कॉर्पोरेट परस्ती में मशगूल नीतीश सरकार द्वारा मात्र 15 से 20 रुपए गन्ना मूल्य बढ़ाना न सिर्फ नाकाफ़ी है बल्कि किसानों के साथ एक भद्दा मजाक है:- उमेश सिंह
*गन्ना मूल्य 600 करने के लिए सरकार 210 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दे: किसान महासभा*
*पटना* *10 जनवरी 2026*
अखिल भारतीय किसान महासभा बिहार राज्य सचिव उमेश सिंह एवं बिहार राज्य गन्ना उत्पादक किसान महासभा के अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने अपने संयुक्त प्रेस बयान में आज कहा कि बिहार सरकार ने गन्ना किसानों के गन्ना मूल्य बढ़ाने के लंबे समय से 600 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग को दरकिनार करते हुए मात्र 15 से 20 रुपए बढ़ाए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गन्ना पेराई सत्र 2025-26 से गन्ने के मूल्य में मात्र 15 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है,जो नाकाफ़ी है और किसानों के साथ भद्दा मजाक है इसे ऊंट के मुंह में जीरा की संज्ञा देते हुए कहा कि गन्ना उत्पादक किसान गन्ना मूल्य 600 रुपए प्रति किवंटल करने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं लेकिन चीनी मिलों के प्रबंधकों, बिहार सरकार और गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक में जो रेट तय हुआ है वह नीतीश कुमार की कॉर्पोरेट परस्ती का नमुना है। तथा बैठक में जिन लोगों को किसानों के प्रतिनिधियों के बतौर पेश किया जाता है वह राज्य और देश में संघर्षरत किसानों के संगठन के प्रतिनिधि नहीं होते बल्कि चीनी मिलों के प्रबंधकों के पक्षधर होते हैं।उनको किसानों से कोई मतलब नहीं होता है।
किसान नेताओं ने गन्ना मूल्य कम बढ़ाए जाने की निन्दा करते हुए कहा कि इस बढ़ाए गए गन्ना मूल्य से गन्ना किसानों को कोई फायदा नहीं है। सरकार हमेशा कॉर्पोरेट जगत को ही खुश करने और सब्सिडी देने में मशगूल रहतीं हैं। उचित गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाने से प्रतिवर्ष गन्ना की खेती का रकबा कम होते जा रहा है।नेताओं ने कहा कि आज सुखी लकड़ी भी 800 रुपए प्रति क्विंटल बाजार में बिकता है लेकिन गन्ना मूल्य मात्र 390 रुपए प्रति क्विंटल यह किसानों को बर्दाश्त नहीं।सरकार और चीनी मिल मालिकों द्वारा किसानों को लुटने की परंपरा बंद होनी चाहिए और सरकार किसानों को 210 रुपए बोनस के रूप में दे ताकि खेती में घाटे की भरपाई किया जा सके और किसानों को 600 रुपए गन्ना मूल्य हो सके।
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