पीएमसीएच में पहली बार गर्दन और स्पाइन के जंक्शन की इंटेरियर सर्वाइकल एप्रोच से सर्जरी

पीएमसीएच में पहली बार गर्दन और स्पाइन के जंक्शन की इंटेरियर सर्वाइकल एप्रोच से सर्जरी

 ऑर्थोपेडिक और स्पाइन सर्जन डॉ(प्रो) महेश प्रसाद ने की सर्जरी 
पटना।
पीएमसीएच में शुक्रवार को पहली बार एक युवक के गर्दन और स्पाइन के जंक्शनल एरिया (सर्वविकोथोरासीक सी7-टी1) की एंटीरियर  सर्वाइकल एप्रोच से सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सिर्फ तीन टांका का चीरा लगा कर सर्जरी को अंजाम दिया गया। अब युवक बेहतर है और जल्द उसकी एक्सरसाइज शुरू होगी। सर्जरी ऑर्थोपेडिक और स्पाइन सर्जन डॉ (प्रो) महेश प्रसाद और उनकी टीम ने की। 
सिकंदरा, जमुई के रहने वाले 45 वर्षीय अनिक पासवान (बदला हुआ नाम) एक रोड एक्सीडेंट में बुरी तरह घायल हो गए थे। हादसा इतना गंभीर था कि उनके गर्दन के सबसे नीचे की हड्डी टूट गई थी। यह हड्डी स्पाइन और गर्दन की हड्डी के जंक्शन पर टूटा (सी7-टी1) । यह बेहद संवेदनशील जगह होती है। सर्वाइकोथोरैसिक जंक्शन एरिया ( गर्दन की हड्डी खत्म होने और डॉर्सल स्पाइनल शुरू होने की जगह) में एंटेरियर सर्वाइकल एप्रोच के जरिए मरीज की सफल सर्जरी की गई। अब वह बिल्कुल ठीक है और उसे फिजियोथेरेपी दी जाएगी।
सर्जरी करनेवाले ऑर्थोपेडिक और स्पाइन सर्जन डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद मरीज करीब 10-12 दिन बाद हॉस्पिटल पहुंचा था। उसके हाथ में ताकत नहीं बची थी और पैर बिल्कुल भी काम नहीं कर रहे थे। यह पीएमसीएच के इतिहास में अपने तरह की पहली सर्जरी है। इस सर्जरी चुनौती काफी ज्यादा थी। क्योंकि सर्जरी जंक्शन पर होनी थी। हमने आगे के हिस्सा से सर्जरी करने का निर्णय लिया और वह सफल रहा। यह एक गंभीर मेडिकल कंडीशन था। पहले स्पाइनल कॉर्ड में जो दवाब आ गया था उसे खत्म किया गया फिर खिसकी हुई हड्डी को ठीक किया गया। आगे से प्लेट लगाकर इसे फिक्स किया गया।      इसमें एनीस्थिसिया विभाग की मदद बेहद महत्वपूर्ण रही। पीएमसीएच में इस तरह की सर्जरी रेगुलर हो रही है। लोगों की परेशानी बेहद कम हो गई। निजी अस्पताल में यही सर्जरी लाखों रूपए में होती है। अमूमन लोग प्रदेश से बाहर चले जाते हैं। क्योंकि उन्हें डर होता है कि पटना में सफल इलाज हो पाएगा या नहीं। 
एनीस्थिसिया विभाग के एचओडी डॉ. सुदामा प्रसाद ने बताया कि पीएमसीएच के इतिहास में पहली बार सर्वाइकोथोरैसिक जंक्शन एरिया की सर्जरी की गई है। एनेस्थिसिया के लिहाज से भी यह बेहद चुनौतीपूर्ण केस था। इसमें मुझे अपनी टीम के डॉ अजय कुमार का अच्छा सहयोग मिला। 
डॉ महेशन प्रसाद ने बताया कि हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ राकेश चौधरी इस तरह की सर्जरी को हमेशा बढ़ावा देते हैं और प्रशंसा करते हैं।  
सर्जरी में सीनियर रेजीडेंट डॉ. अकरम, डॉ. राजू, डॉ. सत्यजीत तथा पीजी थर्ड इयर के डॉ. कुमार श्रेयस्कर, डॉ सत्यजीत, डॉ. आलोक कुमार, पीजी सेकेंड इयर के डॉ. मनींद्र कुमार, डॉ.कुमार देवंत, पीजी फस्र्ट इयर के डॉ. आशीष रंजन, डॉ.सुमन चंद्रा और डॉ. गौरव कुमार सर्जरी के दौरान मौजूद रहे।

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