मखाना को मिलेगा बड़ा बाजार: खेतिका ने मिथिला के कुरकुरे मखाने को बनाया अपनी स्नैकिंग रणनीति का अहम हिस्सा
सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए चरणबद्ध तरीके से ₹20 करोड़ का निवेश करेगी खेतिका। कंपनी का लक्ष्य मखाने को भारत में रोजमर्रा के स्नैक के रूप में लोकप्रिय बनाना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है।
गौरीचक/पटना 26 अक्टूबर 2026: भारत के प्रमुख क्लीन-फूड ब्रांड्स में से एक खेतिका ने आज अपने मखाना कारोबार के विस्तार की घोषणा की। इसके तहत कंपनी ने मखाने से बने पांच तरह के स्नैक्स लॉन्च किए हैं। इस विस्तार को समर्थन देने के लिए कंपनी ने बिहार के पटना में 35,000 वर्ग फुट में फैली एक विशेष मखाना प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की है। अपने मौजूदा मखाना कारोबार को आगे बढ़ाते हुए, कंपनी सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में विशेष निवेश कर रही है। इसका उद्देश्य मिथिला मखाना को पारंपरिक इस्तेमाल से आगे ले जाकर अपने व्यापक फूड पोर्टफोलियो की एक प्रमुख कैटेगरी बनाना है।
इस लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए डॉ. पृथ्वी सिंह, सह-संस्थापक एवं सीईओ, खेतिका ने कहा, “हम मखाने को वह पहचान और बड़े स्तर पर पहुंच दिलाना चाहते हैं, जिसका वह हकदार है। हमारे लिए यह मिथिला क्षेत्र से जुड़े एक पारंपरिक उत्पाद को देशभर के उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की स्नैकिंग का हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समय के साथ हम इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भी ले जाना चाहते हैं। खेतिका में हमारा मानना है कि स्वच्छ और बेहतर भोजन हर रोज के खानपान का हिस्सा होना चाहिए, न कि केवल मुख्य भोजन तक सीमित रहना चाहिए। स्नैकिंग इस दिशा में अगला स्वाभाविक कदम है। मखाना हमें एक ऐसे परिचित भारतीय उत्पाद को आगे बढ़ाने का अवसर देता है, जिसमें अच्छा स्वाद और सामग्री को लेकर अधिक पारदर्शिता, दोनों शामिल हैं। सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में विशेष क्षमताएं विकसित करने के लिए निवेश करके हम इस कैटेगरी के विकास की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं, ताकि मिथिला मखाना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।”
सबके लिए स्वच्छ और बेहतर भोजन’ के अपने विजन के अनुरूप, खेतिका मखाने को उन उपभोक्ताओं के लिए एक बेहतर विकल्प मानती है, जो सुविधाजनक, स्वादिष्ट और अपेक्षाकृत बेहतर स्नैकिंग विकल्प चाहते हैं। मिथिला की खाद्य परंपराओं से जुड़ा मखाना एक ऐसा भारतीय उत्पाद है, जिसे आधुनिक स्नैकिंग की आदतों का हिस्सा बनाया जा सकता है। कंपनी का फोकस इसके साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पारदर्शिता बनाए रखने पर भी है।
शुरुआती रेंज में मखाने के पांच फ्लेवर पेश किए गए हैं—कोरियन किमची, पेरी पेरी, लाइम एंड चिली, हिमालयन पिंक सॉल्ट और सॉल्ट एंड पेपर। अलग-अलग फ्लेवर के अनुसार, इन उत्पादों की विशेषताओं में ऑलिव ऑयल में रोस्टिंग, प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल न करना, ग्लूटेन-फ्री फॉर्मूलेशन और डाइटरी फाइबर व प्लांट प्रोटीन का स्रोत होना शामिल है। यह रेंज खेतिका के इस विचार को आगे बढ़ाती है कि ‘ऐसा स्नैक, जिसमें कुछ भी छिपाने की जरूरत न हो।’ इसमें स्वाद के साथ सामग्री की स्पष्ट जानकारी देने पर जोर दिया गया है। छोटे पैक की शुरुआती अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) ₹50 रखी गई है। कंपनी की योजना इन उत्पादों को ई-कॉमर्स, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, रिटेल स्टोर्स और अपनी वेबसाइट के माध्यम से देशभर में उपलब्ध कराने की है।
यह लॉन्च खेतिका की व्यापक स्नैकिंग रणनीति की शुरुआत है। शुरुआती रेंज के अलावा, कंपनी मखाना चिप्स, मखाना मिक्स, नए फ्लेवर और मखाने से बने अन्य स्नैक्स पेश करने की संभावनाओं पर भी काम करेगी। कंपनी की आगामी स्नैकिंग रेंज में बीजों से बने स्नैक्स और खजूर आधारित उत्पाद भी शामिल हैं। भविष्य में नए उत्पादों का विकास उपभोक्ताओं की पसंद और स्नैकिंग से जुड़ी बदलती आदतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
इस विस्तार का मुख्य आधार पटना में स्थापित खेतिका की नई मखाना और मखाना स्नैक्स प्रोसेसिंग यूनिट है। कंपनी की सबसे बड़ी यूनिट्स में शामिल यह प्लांट 35,000 वर्ग फुट में फैला है। इसकी सालाना प्रोसेसिंग क्षमता 500 मीट्रिक टन है और इसमें चरणबद्ध तरीके से ₹20 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। इस साल भारत में स्थापित की गई यह कंपनी की दूसरी नई यूनिट है। इसके साथ ही खेतिका की कुल यूनिट्स की संख्या बढ़कर सात हो गई है। इस प्लांट में सोर्सिंग के बाद मखाने की सफाई, ग्रेडिंग, रोस्टिंग, पॉपिंग और फ्लेवरिंग से लेकर पैकेजिंग तक की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
₹20 करोड़ का यह निवेश केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। इसमें सोर्सिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केटिंग और ब्रांडिंग, सप्लाई चेन तथा निर्यात से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं। इस निवेश का उद्देश्य ऐसी क्षमताएं विकसित करना है, जो आने वाले वर्षों में मखाना कैटेगरी को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद करेंगी।
खेतिका की इस रणनीति में मखाने की सोर्सिंग की अहम भूमिका है। कंपनी बिहार के किसानों से 100% मिथिला मखाना सीधे खरीदती है। इसमें पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पटना में विशेष प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने से मखाने के उत्पादन क्षेत्रों के करीब ही इसकी प्रोसेसिंग संभव हो सकेगी। इससे उत्पाद की हैंडलिंग, गुणवत्ता और ताजगी पर बेहतर नियंत्रण रखने के साथ पूरी सप्लाई चेन में उसकी ट्रेसबिलिटी यानी उत्पाद के स्रोत और सफर का पता लगाने की व्यवस्था मजबूत होगी।
यह निवेश बिहार की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहयोग देगा। इससे रोजगार के अवसर पैदा करने और क्षेत्र में मखाना उद्योग से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खेतिका की प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचने से पहले किसान मखाने को रोस्ट करने और हाथों से पॉप करने की पारंपरिक प्रक्रिया अपनाते हैं। इस तरह पारंपरिक कौशल को आगे की प्रोसेसिंग में बेहतर नियंत्रण वाली व्यवस्था के साथ जोड़ा जा रहा है।
कंपनी की योजना मखाने की सोर्सिंग वाले क्षेत्र में एक ‘साथी केंद्र’ स्थापित करने की भी है, ताकि किसानों के साथ जुड़ाव और सहयोग को मजबूत किया जा सके। इसके साथ ही कंपनी मखाना उद्योग को समर्थन देने वाली मौजूदा सरकारी पहलों के साथ तालमेल बनाने की दिशा में भी काम करना चाहती है।
खेतिका के अनुमान के अनुसार, भारत में मखाने का बाजार करीब ₹10,000 करोड़ का है। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में इस बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करना है, जो ₹500 करोड़ के कारोबार की महत्वाकांक्षा के बराबर है। कंपनी को उम्मीद है कि मखाना उसके कुल राजस्व में लगभग 20% का योगदान देगा।
भारत के अलावा, खेतिका की योजना मिथिला मखाना को अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के बाजारों तक पहुंचाने की भी है। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य बिहार की कृषि और खानपान की समृद्ध परंपराओं से जुड़े इस उत्पाद को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना और इसके आधार पर स्नैकिंग की एक मजबूत पहचान बनाना है। इस विस्तार के दौरान कंपनी अपने मूल विजन ‘सबके लिए स्वच्छ और बेहतर भोजन’ के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहती है।
0 Response to "मखाना को मिलेगा बड़ा बाजार: खेतिका ने मिथिला के कुरकुरे मखाने को बनाया अपनी स्नैकिंग रणनीति का अहम हिस्सा"
एक टिप्पणी भेजें