बिहार के मत्स्य क्षेत्र में क्रांति का आगाजएफआईडीएफ के अंतर्गत नाबार्ड ने बिहार सरकार को ₹195 करोड़ का ऋण किया स्वीकृत
पटना, बिहार, दिनांक: 25.09.2026
बिहार में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास को अब नई दिशा और गति मिलेगी। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने मत्स्य पालन अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के अंतर्गत बिहार सरकार को सीवान जिले में आधुनिक मत्स्य अवसंरचना के विकास, मछली उत्पादन में वृद्धि तथा मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आय और आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ₹195 करोड़ के ऋण की स्वीकृति प्रदान की है।
आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का होगा विकास
स्वीकृत ऋण राशि का उपयोग जिले में मत्स्य क्षेत्र से संबंधित विभिन्न आधारभूत संरचनाओं के निर्माण, विकास एवं उन्नयन के लिए किया जाएगा। इसके अंतर्गत आधुनिक मत्स्य पालन इकाइयों की स्थापना, मछली बीज उत्पादन केंद्रों एवं हैचरियों का विकास, मत्स्य संग्रह एवं लैंडिंग केंद्रों का निर्माण, शीत भंडारण तथा कोल्ड चेन सुविधाओं का विस्तार, मछली प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना, आधुनिक मत्स्य बाजारों का विकास तथा परिवहन एवं विपणन से संबंधित सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, जल संसाधनों के बेहतर एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए आवश्यक संरचनात्मक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इन आधारभूत सुविधाओं के विकसित होने से मछली पालकों को उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण, भंडारण तथा विपणन की संपूर्ण श्रृंखला में बेहतर सहयोग प्राप्त होगा। इसके परिणामस्वरूप मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता एवं मूल्य संवर्धन में वृद्धि होगी, किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार एवं उचित मूल्य प्राप्त होंगे तथा जिले में मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन और आय वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
मछली पालकों और ग्रामीण युवाओं को मिलेगा लाभ
यह परियोजना सीवान जिले के छोटे एवं सीमांत मछली पालकों, मत्स्य सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों, महिला समूहों और ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आएगी।
परियोजना के माध्यम से वैज्ञानिक मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित मत्स्य आहार, जल प्रबंधन, रोग नियंत्रण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने और मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाने में सहायता मिलेगी।
मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ चारा आपूर्ति, परिवहन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
सतत और समावेशी विकास पर जोर
नाबार्ड, बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री गौतम कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विस्तार तथा ग्रामीण समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए नाबार्ड निरंतर प्रयासरत है। एफआईडीएफ के अंतर्गत दी गई यह ऋण सहायता सीवान जिले में संगठित, आधुनिक, समावेशी और टिकाऊ मत्स्य विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बिहार सरकार के मत्स्य, डेयरी एवं पशु संसाधन द्वारा परियोजना को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू किया जाना है । ₹195 करोड़ की यह स्वीकृति सीवान के मत्स्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। बेहतर सुविधाओं, आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग के साथ यह परियोजना मछली उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजित करने, ग्रामीण आय को मजबूत करने और सीवान को मत्स्य विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में प्रभावी भूमिका निभाएगी।
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