विश्वास और पारदर्शिता" डेरी सहकारी समितियों के सतत विकास का मुख्य आयाम है: सचिव, डेरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, कॉम्फेड
21 अगस्त 2026 को कोलकाता में भारत सरकार के राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के घटक बी, सहकारिता के माध्यम से डेयरी विकास (JICA समर्थित परियोजना) के अंतर्गत क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री शीर्षत कपिल अशोक, आईएएस, सचिव, डेयरी मत्स्य पालन और पशु संसाधन, बिहार सरकार और अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, कॉम्फेड ने कहा कि विश्वास और पारदर्शिता डेयरी सहकारी समितियों के सतत विकास का मुख्य आयाम है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉम्फेड और उसके संबद्ध दुग्ध संघों द्वारा दूध की खरीद बढ़ाने के लिए, दुग्ध उत्पादक सदस्यों के दुग्ध खरीद मूल्य को सीधे खाते में हस्तांतरण (डीएटी) की प्रक्रिया से विश्वास और पारदर्शिता से संबंधित उपायों को लागू किया जा रहा है। यह कार्यशाला पूर्वी क्षेत्र के अंतर्गत बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सहकारी डेयरी महासंघों और दुग्ध संघों के वरीय अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड और पशु पालन एवं डेरी विभाग, भारत सरकार द्वारा आयोजित की गयी थी।
DTC-JICA प्रोजेक्ट को लागू करने और निर्धारित लक्ष्यो को पूरा करने मे बिहार के दुग्ध संघ राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल रहे ।
वर्कशॉप में बिहार में DTC-JICA फेज़। के तहत लागू करने और उपलब्धियों की समीक्षा की गयी। इसमें हिस्सा लेने वाले इंस्टीट्यूशन्स ने डेयरी वैल्यू चेन में अपनी सफलता की कहानियां, चुनौतियां और सीख शेयर कीं। इसमें डेयरी कोऑपरेटिव नेटवर्क को मजबूत करना और उससे दूध खरीदना, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट बनाने की सुविधाओं को मॉडर्न बनाना शामिल है। वर्कशॉप के दौरान DTC-JICA के अलग-अलग हिस्सों के रीजनल रिव्यू के दौरान, दूध खरीदने, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के टारगेट के मुकाबले COMFED और उससे जुड़े दुग्ध संघो उपलब्धियां राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पाई गईं। बिहार की डेयरी कोऑपरेटिव्स के लिए इस रिव्यू के दौरान पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के आयामो की सफलता दर की भी तारीफ की गई।
DTC-JICA के अगले प्रस्तवित चरण (फेज़ ।।) को कांफेड तथा संबद्ध दुग्ध संघो मे लागू करने के लिए
गहन विचार विमर्श
फेज़। से मिले अनुभव और सीख के आधार पर, प्रस्तावित डेयरी डेवलपमेंट फेज़ ॥ को इस पहल का फ़ायदा दूसरे राज्यों तक पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें डेयरी कोऑपरेटिव को मज़बूत करने के लिए ज़्यादा कवरेज और ज़्यादा सपोर्ट शामिल है। बातचीत में प्रस्तावित हिस्से, फंडिंग पैटर्न और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, राज्य-वार ज़रूरतों का अंदाज़ा लगाने के लिए हितधारकों के साथ बातचीत और कोऑपरेटिव डेयरी सेक्टर के लिए प्रस्तावित एक्रिडेशन फ्रेमवर्क पर चर्चा शामिल थी। इसी वर्कशॉप में श्वेत क्रांति 2.0 के तहत नई डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी के संगठन और रजिस्ट्रेशन में राज्य-वार उपलब्धि और डेयरी विकास पोर्टल पर डेटा अपडेट की स्थिति की भी समीक्षा की गयी।
वर्कशॉप में केंद्र और राज्य सरकार के दूसरे वरीय अधिकारी भी शामिल हुए, जिनमे श्री दीपांजन भट्टाचार्य, प्रबंध निदेशक, वेस्ट बंगाल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड, श्री दयानंद सावंत, डिप्टी कमिश्नर (DD), पशु पालन एवं डेरी विभाग, भारत सरकार श्री राजेश गुप्ता, प्रबंध निदेशक, झारखंड मिल्क फेडरेशन; पूर्वी राज्यों के मिल्क यूनियन और फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा अन्य वरीय अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के अधिकारी भी शामिल रहे।
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