वास्तुशास्त्र और घर की सकारात्मक ऊर्जा

वास्तुशास्त्र और घर की सकारात्मक ऊर्जा

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 08 अगस्त ::
 
भारतीय संस्कृति में घर को केवल रहने का स्थान नहीं माना जाता है, बल्कि इसे ऊर्जा का केंद्र भी समझा जाता है। प्राचीन समय से ही ऋषि-मुनियों ने वास्तुशास्त्र के माध्यम से यह बताया है कि घर की दिशा, वस्तुएं और सजावट जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में रखी गई वस्तुएं केवल सजावट का साधन नहीं होती है, बल्कि वे सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए घर में प्रतिमाएं, चित्र या अन्य वस्तुएं रखते समय उनके प्रतीकात्मक अर्थ और स्थान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। विशेष रूप से धातु की प्रतिमाएं (जैसे पीतल, चांदी, तांबा आदि) वास्तु में अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। धातु ऊर्जा को संतुलित करने का कार्य करती है और घर में समृद्धि, शांति और सौभाग्य लाने में सहायक होती है। वास्तुशास्त्र में कुछ ऐसे पशु-पक्षी बताए गए हैं जिनकी धातु प्रतिमा घर में रखना शुभ माना जाता है। इन प्रतिमाओं का संबंध धन, वैभव, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रेम और सफलता से जोड़ा जाता है।

भारतीय संस्कृति में हाथी को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली पशु माना जाता है। भगवान गणेश का मुख भी हाथी का ही होता है, इसलिए हाथी का संबंध बुद्धि, शक्ति और समृद्धि से जोड़ा जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में हाथी की धातु प्रतिमा रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से पीतल या चांदी का हाथी घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। हाथी को ऐश्वर्य, धन और राजसी वैभव का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन समय में राजमहल और मंदिरों के द्वार पर हाथियों की प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलते हैं। परिवार में सौहार्द बना रहता है और मानसिक शांति मिलती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चांदी का हाथी घर में रखने से राहु ग्रह के दोष कम होते हैं। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में पंचम या द्वादश भाव में राहु हो, उनके लिए चांदी का हाथी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। हाथी की मूर्ति मुख्य द्वार के पास, ड्राइंग रूम में, शयनकक्ष में रखना चाहिए। यदि पति-पत्नी के बीच मतभेद होते हों तो शयनकक्ष में पीतल का हाथी रखना लाभदायक माना जाता है।

हंस भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विवेक और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। देवी सरस्वती का वाहन भी हंस ही है। हंस को ऐसा पक्षी माना जाता है जो दूध और पानी में अंतर कर सकता है, इसलिए इसे विवेक और बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में हंस के जोड़े की प्रतिमा रखने से घर में शांति बनी रहती है। आर्थिक समृद्धि बढ़ती है। परिवार में प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। दांपत्य जीवन सुखी रहता है। 

हंस की प्रतिमा को घर के अतिथि कक्ष (ड्राइंग रूम) में रखना शुभ माना जाता है। यदि हंस की प्रतिमा उपलब्ध न हो तो बत्तख के जोड़े, सारस के जोड़े की प्रतिमा भी रख सकते हैं। ये भी दांपत्य जीवन में सामंजस्य बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

कछुआ हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु का दूसरा अवतार कूर्म अवतार कछुए के रूप में ही था। समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने कछुए का रूप धारण करके मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला था। इसलिए कछुए को स्थिरता और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। घर में कछुए की धातु प्रतिमा रखने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है। आयु लंबी होती है। जीवन में स्थिरता आती है और करियर में उन्नति होती है।

वास्तु के अनुसार कछुए की मूर्ति रखने की सबसे अच्छी दिशा उत्तर दिशा और पूर्व दिशा मानी जाती है। इसे ड्राइंग रूम में पानी से भरे पात्र में रखना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि कछुए की मूर्ति धातु की होनी चाहिए, लकड़ी की नहीं।

तोता एक ऐसा पक्षी है जिसे भारतीय संस्कृति में प्रेम, सौभाग्य और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। तोता रंग-बिरंगे पंखों वाला पक्षी है और इसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु के अनुसार तोता पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का संतुलन स्थापित करने में मदद करता है। यदि बच्चों की पढ़ाई में रुचि कम हो तो अध्ययन कक्ष में तोते की प्रतिमा रखना लाभदायक माना जाता है। 

तोते की मूर्ति अध्ययन कक्ष, बच्चों के कमरे में उत्तर दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ती है। पढ़ाई में रुचि बढ़ती है। फेंगशुई के अनुसार तोते के जोड़े की प्रतिमा रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है।

कई लोग घर में एक्वेरियम में मछली पालते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार धातु की मछली की प्रतिमा भी उतनी ही शुभ मानी जाती है। हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु का पहला अवतार मत्स्य अवतार था। इसलिए मछली को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मछली की मूर्ति रखने से धन और समृद्धि में वृद्धि, घर में शांति, स्वास्थ्य में सुधार और व्यापार में सफलता मिलती है। मछली की प्रतिमा को उत्तर-पूर्व दिशा या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है।

भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय को कामधेनु का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। घर में गाय और बछड़े की धातु प्रतिमा रखने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। मानसिक शांति मिलती है। परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है गाय-बछड़े की मूर्ति को पूजा घर या अध्ययन कक्ष में रखा जा सकता है।

ऊंट को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने वाला पशु माना जाता है। ऊंट धैर्य, सहनशीलता और परिश्रम का प्रतीक है। इसलिए व्यापार और करियर में सफलता के लिए ऊंट की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है। ऊंट की मूर्ति रखने से करियर में उन्नति, व्यापार में सफलता, मानसिक स्थिरता और परिवार में शांति मिलती है। ऊंट की प्रतिमा को ड्राइंग रूम या लिविंग रूम में उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है।

वास्तुशास्त्र में केवल पशु-पक्षियों की प्रतिमाएं ही नहीं बल्कि कई अन्य वस्तुओं को भी शुभ माना गया है। जैसे- शालिग्राम, रुद्राक्ष, गोमती चक्र, श्रीयंत्र, पारद शिवलिंग, दक्षिणावर्ती शंख, कौड़ी, हल्दी की गांठ इन सभी वस्तुओं का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार प्रतिमाएं रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। घर में कभी भी टूटी-फूटी या खंडित प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए। प्रतिमाओं को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। गलत दिशा में रखी गई प्रतिमा का प्रभाव कम हो सकता है। कुछ प्रतिमाएं जोड़े में रखना शुभ माना जाता है, जैसे हंस, तोता और ऊंट।

आज के आधुनिक जीवन में भी वास्तुशास्त्र का महत्व कम नहीं हुआ है। लोग अपने घरों में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वास्तु के नियमों का पालन करते हैं। हालांकि वास्तुशास्त्र को आस्था और परंपरा के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

घर में धातु की प्रतिमाएं रखना केवल सजावट का साधन नहीं है, बल्कि यह  संस्कृति और परंपरा का हिस्सा भी है। वास्तुशास्त्र के अनुसार हाथी, हंस, कछुआ, तोता, मछली, गाय और ऊंट जैसी प्रतिमाएं घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने में सहायक मानी जाती हैं। इन प्रतिमाओं को सही दिशा और स्थान पर रखने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बढ़ने की मान्यता है। हालांकि हर घर की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी विशेष वास्तु उपाय को अपनाने से पहले वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित माना जाता है।
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