भाजपा के नेता मदरसा के संदर्भ में उन्मादी भाषा इस्तेमाल करके शिक्षा के माहौल को एजेंडा के तहत नफरत की आग में झोंकना चाहते हैं ; जो कहीं से उचित नहीं है : एजाज अहमद
पटना 5 अगस्त 2026
बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के द्वारा मदरसा के संबंध में दिए गए वक्तव्य पर घोर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा कि उनके इस तरह के वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि बुनियादी शिक्षा और तालिमी माहौल से लोगों को दूर रखने के लिए ही भाजपा के नेता सोची समझी साजिश के तहत उत्तर प्रदेश में इस तरह के वातावरण का निर्माण चुनाव से पहले जानबूझ कर करना चाहती है, क्योंकि भाजपा जनता के आम जनों के मुद्दे से और बेहतर शिक्षा के माहौल से लोगों को दूर रखना चाहती है।
एजाज ने आगे कहा की मदरसे से पढ़े भारत के कुछ महान विभूतियों के संदर्भ में जान लेते तो केशव प्रसाद मौर्य जैसे लोग इस तरह का वक्तव्य देने से पहले सौ बार सोचते उन्हें पता होना चाहिए कि भारत के महान उर्दू हिंदी के महान कथाकार और उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद उर्दू-फ़ारसी की प्रारंभिक शिक्षा मदरसा से ही प्राप्त की।
राजा शिवप्रसाद 'सितारे-हिंद' — प्रख्यात शिक्षाविद, इतिहासकार और हिंदी गद्य के आरंभिक उन्नायकों में से एक ने अरबी-फ़ारसी की पारंपरिक शिक्षा प्राप्त की।
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम — भारत के 11वें राष्ट्रपति एवं प्रख्यात एयरोस्पेस वैज्ञानिक। बचपन में स्थानीय मदरसे में धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त की।
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद — स्वतंत्रता सेनानी, भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री एवं भारत रत्न। प्रारंभिक शिक्षा मदरसा में हुई।
मौलाना महमूद हसन देओबंदी — स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता, रेशमी रुमाल आंदोलन के प्रमुख प्रेरक।
मौलाना फज़्ले हक़ खैराबादी — 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े विद्वान, दार्शनिक एवं उर्दू-फ़ारसी के प्रतिष्ठित साहित्यकार।
मोहम्मद हामिद अंसारी — भारत के 12वें उपराष्ट्रपति एवं वरिष्ठ राजनयिक। प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा मदरसो में ,उच्च शिक्षा आधुनिक संस्थानों में हुई।
मौलाना हुसैन अहमद मदनी — स्वतंत्रता सेनानी, दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख विद्वान और संयुक्त भारतीय राष्ट्रवाद के समर्थक।
अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ — काकोरी कांड के अमर क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी। प्रारंभिक पारंपरिक इस्लामी शिक्षा प्राप्त की।
रघुपति सहाय "फिराक़ गोरखपुरी" — ज्ञानपीठ सम्मानित उर्दू कवि, साहित्यकार और शिक्षाविद। बचपन में अरबी-फ़ारसी की शिक्षा मदरसे में प्राप्त की।
एजाज ने आगे कहा कि भाजपा के नेता एजेंडे की राजनीति तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें यह पता होना चाहिए कि ज्ञान किसी एक संस्था, समुदाय या पद्धति का मोहताज नहीं होता; व्यक्ति की पहचान उसके कर्म, चरित्र और योगदान से होती है। इस तरह की उन्मादी भाषा इस्तेमाल कर भाजपा कहीं ना कहीं समाज में नफरत का वातावरण बनाकर राजनीतिक रोटी सीखना चाहती है और आम जनों को बुनियादी शिक्षा से वंचित रखना चाहती है यह कहीं से उचित नहीं है।
0 Response to "भाजपा के नेता मदरसा के संदर्भ में उन्मादी भाषा इस्तेमाल करके शिक्षा के माहौल को एजेंडा के तहत नफरत की आग में झोंकना चाहते हैं ; जो कहीं से उचित नहीं है : एजाज अहमद"
एक टिप्पणी भेजें