पटना विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 बचाने के लिए छात्र–शिक्षक–कर्मचारी एकजुट हों" - आइसा
बिहार भर के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हो रहे हमले और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को समाप्त करने के प्रस्ताव के खिलाफ आज पटना कॉलेज कैंटीन के सामने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), पटना विश्वविद्यालय इकाई द्वारा छात्र–शिक्षक–कर्मचारी परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पटना कॉलेज तथा वाणिज्य महाविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन आइसा पटना विश्वविद्यालय की सचिव कॉमरेड सबा आफ़रीन ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुबोध ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक चरित्र और अकादमिक गरिमा की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय का नियंत्रण नौकरशाही के हाथों सौंपा गया तो उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता पर गंभीर आघात होगा। उन्होंने इस लड़ाई को सफल बनाने के लिए छात्र–कर्मचारी एकता को निर्णायक बताते हुए साझा आंदोलन का आह्वान किया।
एआईसीसीटीयू के नेता एवं पटना विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र कॉमरेड रणविजय ने भी विश्वविद्यालयों पर बढ़ते केंद्रीकरण के खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं आइसा नेताओं कॉमरेड सबा आफ़रीन, कॉमरेड आदर्श, कॉमरेड आशीष, कॉमरेड अनुज और कॉमरेड आज़ाद ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय किसी सरकारी विभाग का विस्तार नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का साझा लोकतांत्रिक संस्थान है। इसलिए पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता की रक्षा का संघर्ष पूरे बिहार की उच्च शिक्षा को बचाने का संघर्ष है।
कार्यक्रम में आइसा पटना विश्वविद्यालय की सचिव कॉमरेड सबा आफ़रीन, उपाध्यक्ष कॉमरेड आशीष, पटना कॉलेज सचिव कॉमरेड आदर्श, दरभंगा हाउस अध्यक्ष कॉमरेड आज़ाद, तथा साथी मोनू, रोहन, अनुज, विवेक आनंद सुंदर, अमृता, शीनू और जुनैद सहित अनेक छात्र कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आइसा ने घोषणा की कि *"एक इंच पीछे नहीं हटेंगे!PU की स्वायत्तता की गारंटी लेकर रहेंगे!"* के संकल्प के साथ सेव पटना यूनिवर्सिटी अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा।
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