बरसात में त्वचा संक्रमण से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार : डॉ. आर. के. गुप्ता

बरसात में त्वचा संक्रमण से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार : डॉ. आर. के. गुप्ता

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 22 जुलाई, पटना 2026 ::

बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली, ठंडी हवाएँ और प्राकृतिक सौंदर्य लेकर आता है। यह मौसम मन को सुकून देता है, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से कई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से त्वचा इस मौसम में सबसे अधिक प्रभावित होती है। वातावरण में बढ़ी हुई नमी (ह्यूमिडिटी), लगातार पसीना आना, गीले कपड़े पहनना, दूषित पानी के संपर्क में आना तथा स्वच्छता की कमी के कारण त्वचा संबंधी संक्रमण तेजी से फैलते हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए तो साधारण खुजली या दाने भी गंभीर संक्रमण का रूप ले सकते हैं। इसलिए बरसात के मौसम में त्वचा की विशेष देखभाल और सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

बरसात के दौरान वातावरण में नमी अधिक रहती है। इस कारण त्वचा लंबे समय तक गीली रहती है और पसीना भी आसानी से नहीं सूखता। यही स्थिति फंगस, बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। यदि व्यक्ति लंबे समय तक गीले कपड़े, मोजे या जूते पहने रहता है तो संक्रमण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके अलावा गंदे पानी और दूषित सतहों के संपर्क में आने से भी त्वचा रोग तेजी से फैलते हैं।

बरसात के मौसम की सबसे सामान्य समस्या है। दाद, खुजली और रिंगवर्म जैसी बीमारियाँ त्वचा पर गोल लाल चकत्तों के रूप में दिखाई देती हैं। इनमें तेज खुजली होती है और समय पर उपचार न मिलने पर यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती हैं।

त्वचा पर फोड़े-फुंसियाँ, पस वाले दाने तथा घावों में संक्रमण इस मौसम में अधिक देखने को मिलता है। गंदगी और नमी इसके प्रमुख कारण हैं। कुछ वायरल त्वचा रोग बरसात में तेजी से फैलते हैं। यदि त्वचा पर असामान्य फफोले, दाने या संक्रमण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। जिन लोगों को पहले से एक्जिमा की समस्या होती है, उनमें बरसात के दौरान खुजली, लालपन और जलन बढ़ सकती है। नमी और एलर्जी इसके लक्षणों को और गंभीर बना देती है।

दूषित पानी, रसायनों या किसी एलर्जी पैदा करने वाली वस्तु के संपर्क में आने से त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और सूजन हो सकती है। बालों की जड़ों में होने वाला संक्रमण, जिसे फॉलिकुलाइटिस कहा जाता है, बरसात में अधिक देखने को मिलता है। इससे छोटे-छोटे दर्दयुक्त दाने बन जाते हैं। बगल, कमर, गर्दन तथा जांघों के बीच त्वचा की सिलवटों में लालपन, जलन और खुजली की समस्या को इंटरट्राइगो कहते हैं। अधिक पसीना और नमी इसका प्रमुख कारण हैं।

पैरों की उँगलियों के बीच होने वाला फंगल संक्रमण बरसात में बहुत आम है। लंबे समय तक गीले मोजे या जूते पहनने से यह समस्या बढ़ जाती है। अधिक पसीना आने से घमौरियाँ हो सकती हैं। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोगों में मुहाँसों की समस्या भी बढ़ जाती है।

कुछ लोगों में संक्रमण का खतरा सामान्य से अधिक होता है। इनमें शामिल हैं मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज। बच्चे और बुजुर्ग। अधिक पसीना आने वाले व्यक्ति। नियमित रूप से जिम जाने वाले या खेलकूद करने वाले। जिन लोगों को पहले से दाद, एलर्जी या एक्जिमा की समस्या रहती है। इन लोगों को बरसात में त्वचा की अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए।

बरसात के मौसम में कुछ सरल आदतें अपनाकर अधिकांश त्वचा रोगों से बचा जा सकता है। त्वचा को हमेशा साफ और सूखा रखें। बारिश में भीगने के बाद तुरंत स्नान करें तथा शरीर को अच्छी तरह सुखाएँ। गीले कपड़े, मोजे और जूते अधिक देर तक न पहनें। सूती तथा ढीले कपड़ों का उपयोग करें ताकि त्वचा को पर्याप्त हवा मिल सके। तौलिया, कपड़े, जूते, कंघी या अन्य व्यक्तिगत वस्तुएँ किसी के साथ साझा न करें। शरीर की सिलवटों को सूखा रखें। आवश्यकता होने पर चिकित्सक की सलाह से एंटीफंगल पाउडर का उपयोग करें। संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखें। त्वचा पर दाद या खुजली होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का प्रयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे संक्रमण और गंभीर हो सकता है।

यदि त्वचा पर लगातार खुजली, लाल चकत्ते, पानी निकलना, पस बनना, घाव, तेज जलन या संक्रमण तेजी से फैलता दिखाई दे, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। समय पर सही पहचान और उचित उपचार से अधिकांश त्वचा रोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं तथा जटिलताओं से बचा जा सकता है।

बरसात का मौसम आनंद और ताजगी का प्रतीक है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही त्वचा संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। स्वच्छता, सूखी त्वचा, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सकीय सलाह अपनाकर अधिकांश संक्रमणों से आसानी से बचा जा सकता है। याद रखें, छोटी-सी खुजली या लाल दाग को भी नज़रअंदाज़ करना भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है।
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