सहकारिता के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में आएगा व्यापक परिवर्तन, निर्यात संवर्धन को मिलेगा नया आयाम ।
पटना, 29 जुलाई 2026 |
राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) एवं मत्स्य निदेशालय, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आज बामेती परिसर, पटना में "कोऑपरेटिव के नेतृत्व में मत्स्य पालन परिवर्तन एवं निर्यात संवर्धन" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला-सह-संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय मंत्री, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार तथा माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग, बिहार सरकार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, सचिव, सहकारिता विभाग, राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम के वरिष्ठ पदाधिकारी, निदेशक, मत्स्य, विभागीय अधिकारी, विभिन्न मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, मत्स्य कृषक तथा अन्य हितधारक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अपने उद्घाटन संबोधन में माननीय मंत्री, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने कहा कि बिहार में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। अब आवश्यकता केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, ब्रांडिंग तथा निर्यातोन्मुख मत्स्य व्यवसाय को बढ़ावा देने की है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएँ इस परिवर्तन की सबसे सशक्त कड़ी बन सकती हैं।
माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग ने अपने संबोधन में कहा कि "सहकार से समृद्धि" की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए मत्स्य सहकारी समितियों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता तथा विपणन सुविधाओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने मत्स्य पालकों से सहकारी मॉडल को अपनाकर संगठित रूप से कार्य करने का आह्वान किया।
सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने कहा कि विभाग मत्स्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर बल दिया।
सचिव, सहकारिता विभाग ने कहा कि सहकारी समितियों को पारदर्शी, तकनीक-सक्षम एवं आत्मनिर्भर संस्थाओं के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि छोटे मत्स्य पालकों को सामूहिक शक्ति का लाभ मिल सके तथा उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित हो।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) के अधिकारियों द्वारा मत्स्य सहकारी समितियों के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता, अवसंरचना विकास, परियोजना वित्तपोषण एवं क्षमता निर्माण संबंधी विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही मत्स्य क्षेत्र में सहकारिता आधारित विकास, निर्यात की संभावनाओं, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, आधुनिक विपणन व्यवस्था तथा कोल्ड चेन अवसंरचना पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी प्रस्तुतियाँ दी गईं।
कार्यक्रम के अंत में निदेशक, मत्स्य, बिहार ने सभी अतिथियों, राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम, विभागीय अधिकारियों, मत्स्य सहकारी समितियों तथा प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को विभाग की भावी कार्ययोजनाओं में समुचित स्थान दिया जाएगा।
कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि सहकारिता आधारित सशक्त मत्स्य मूल्य श्रृंखला विकसित कर बिहार को मत्स्य उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए सभी संबंधित विभाग एवं संस्थाएँ समन्वित रूप से कार्य करेंगे।
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