सरकार अपने आदेश को निष्पक्ष तरीके से लागू करे, पेपर लीक आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को अविलंब रिहा किया जाए : कुणाल
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि बिहार में पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र-युवा आंदोलन से जुड़े 26 जुलाई की शाम 6 बजे तक के सभी मुकदमे वापस लेने का सरकार ने आदेश जारी किया है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के कई जिलों में आंदोलनकारियों को अब तक जेल में रखा गया है। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को केवल बेल पर छोड़ा जा रहा है, जबकि सरकार के आदेश के अनुसार मुकदमे वापस लेकर सभी को रिहा किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि *बेगूसराय* में गिरफ्तार 5 लोगों को अब तक रिहा नहीं किया गया है। *भागलपुर* में गिरफ्तार 41 लोगों में से 18 नाबालिगों को रिहा किया गया तथा 7 लोगों को बेल पर छोड़ा गया है, लेकिन शेष 16 लोग अभी भी जेल में बंद हैं। *जमुई* में 8 लोगों को बेल पर रिहा किया गया है और सरकार द्वारा जारी अधिसूचना की सूची में जमुई जिले का नाम ही शामिल नहीं है। जमुई में अभी भी दो लोग जेल में बंद है।*औरंगाबाद* जिले में गिरफ्तार 3 लोगों को भी अब तक रिहा नहीं किया गया है। कई बार प्रशासन से बातचीत करने के बावजूद प्रदर्शनकारियों की रिहाई सुनिश्चित नहीं की जा रही है।
कुणाल ने कहा कि सरकार के स्पष्ट आदेश के बावजूद छात्रों और युवाओं को जेल में रखना तथा उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करना प्रशासन के दमनात्मक रवैये को दर्शाता है। आंदोलन के दौरान भी पुलिस ने छात्रों पर दमन किया था और अब सरकार के आदेश के बाद भी उसी मानसिकता के साथ काम किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे तक के सभी मुकदमों को वापस लेने संबंधी सरकार के निर्णय को निष्पक्ष और समान रूप से पूरे राज्य में लागू कराया जाए। साथ ही, पेपर लीक आंदोलन से जुड़े राज्य भर के सभी प्रदर्शनकारियों को बिना किसी भेदभाव के अविलंब रिहा किया जाए।
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