अल-नीनो का प्रहार और समाधान (काव्यात्मक रणनीति)। *डॉ0 आशुतोष उपाध्याय*
*प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग*
*भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना – 800014*
(1)
अल-नीनो की गर्म हवायें, धरती का आँचल झुलसाती हैं।
सूखे की यह देती चेतावनी, कृषि का धीरज डगमगाती हैं।
सूझबूझ और तकनीक से हमको, अपनी राह बनानी होगी।
हो कैसे फसल-पशुधन रक्षा?, वैज्ञानिक तकनीकें बताती हैं।
(2)
गंगा-कोशी की पावन माटी को, हम कभी झुलसने नहीं देंगे।
अल-नीनो के भीषण संकट में, फसलों को कम नहीं होने देंगे।
उत्तर के पानी और दक्षिण के सूखे का, बना के रखेंगे संतुलन।
कृषि को नई दिशा देकर, हम बिहार का गौरव बढ़ाकर रहेंगे।
(3)
जिनको कम पानी चाहिए, उन फसलों को अपनाना होगा।
श्री अन्न के वैभव को हमें, फिर जन जन तक पहुंचना होगा।
टपक जल पद्धति अपनाने से, बढ़ती है जल उपयोग दक्षता।
मल्चिंग की तकनीक अपनाकर, मिट्टी में नमी बचाना होगा।
(4)
खेत-खेत में तालाब बनाकर किसान, वर्षा की बूँदें करें संचित।
और समेकित खेती का मार्ग चुनें, ताकि न रहें लाभ से वंचित।
संकट कितना भी गहरा हो, वह मानव श्रम से छोटा ही रहता।
जुड़ जायें जब रणनीति व विज्ञान, फिर हम नहीं होते चिंतित।
(5)
धान की पारंपरिक खेती को छोड़, 'सीधी बुवाई' अपनायेंगे।
सहभागी, शुष्क सम्राट व स्वर्ण श्रेया, जैसी किस्में अपनायेंगे।
मक्के के इस गढ़ में अब, बढ़ायेंगे हम मोटे अनाजों का रकबा।
मडुआ-सावां-कोदो-बाजरा से, सूखे को हर मोर्चे पर हरायेंगे।
(6)
चौर व दियारा की धरा पर, मखाना माछ व परवल अपनायें।
टपक व फब्बारा सिंचाई से, 'गया-नवादा' के संकट टल जायें।
कृषि वानिकी को अपनाकर, बढ़ायें आम-लीची की बागवानी।
फसलों के नीचे सब्जियाँ उगाकर, संकट में ज्यादा आय कमायें।
(7)
पशुओं व पक्षियों को लू के थपेड़ों से बचा, छाया में लाना होगा।
किसान को हरे चारे और 'साइलेज' का, एक कोष बनाना होगा।
पेय जल को उपलब्ध कराकर, रखें किसान उनका आवास स्वच्छ।
समय पर टीकाकरण करवाकर, पोषण पर ध्यान टिकाना होगा।
(8)
जल संचयन व मिट्टी की नमी का, जो किसान ध्यान धरेगा।
सूक्ष्म सिंचाई अपनायेगा, व तरुवर से धरा को हरा करेगा।
जब जगेगी सामाजिक चेतना, होगी आर्थिक सुरक्षा प्रबल।
सरकारी योजना एवं कुशल रणनीति, उनके संकट हरेगा।
(9)
मौसम के संदेशों पर भी, किसानों को रखनी होगी पैनी नजर।
बीमा कवच सुरक्षित कर सकता है, हर किसान का अपना घर।
इस अल-नीनो के चक्रव्यूह को, हमसब मिलकर ही भेद पायेंगे।
जब करेंगे वैज्ञानिक ढंग से कृषि, तब स्वत: घटेगा इसका असर।
(10)
बिहार की मिट्टी सोना उगलेगी, जब विज्ञान का होगा साथ।
हर आपदा छोटी पड़ जायेगी, जब सूझ-बूझ का होगा हाथ।
कम पानी से अधिक उपजाने का, सबको लेना होगा संकल्प।
अल-नीनो के इस दौर में अब, बिहार को समृद्ध बनायें नाथ।
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