कायस्थ गौरव का पुनर्जागरण है -“कायस्थ विरासत”

कायस्थ गौरव का पुनर्जागरण है -“कायस्थ विरासत”

सुरेन्द्र कुमार रंजन, पटना, 19 अप्रैल ::

पटना के आशियाना-दीघा स्थित “विशाल आदित्य अपार्टमेंट” में एक सादे किंतु गरिमामय समारोह के बीच बहुमुखी प्रतिभा के धनी लेखक, पत्रकार और समाजसेवी जितेन्द्र कुमार सिन्हा की द्वितीय कृति “कायस्थ विरासत” का लोकार्पण संपन्न हुआ। यह अवसर न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को भी एक नई दिशा देने वाला साबित हुआ। इससे पूर्व उनकी पहली कृति “शिव तत्त्व” का विमोचन 6 फरवरी 2026 को कंकड़बाग स्थित होटल ऑरेंज इन में किया गया था, जिसे पाठकों ने व्यापक सराहना दी थी।

“कायस्थ विरासत” केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दस्तावेज के रूप में सामने आई है। इसमें सृष्टि के लेखाकार और धर्माधिपति भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति, उनके कार्य और उनके वंशजों से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जानकारियों को अत्यंत शोधपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने उन तथ्यों को उजागर किया है, जो अब तक गुमनामी के अंधेरे में छिपे हुए थे। कायस्थ समाज की पहचान, उसकी परंपराएं, और उसके ऐतिहासिक योगदान को जिस विस्तार और प्रमाणिकता के साथ इस पुस्तक में रखा गया है, वह इसे विशेष बनाता है। पुस्तक का नामकरण भी अत्यंत सार्थक है, क्योंकि यह वास्तव में कायस्थ समाज की समृद्ध विरासत को सामने लाने का कार्य करती है।

जितेन्द्र कुमार सिन्हा का व्यक्तित्व कई आयामों से युक्त है। वे एक सफल पत्रकार, संवेदनशील समाजसेवी और सृजनशील साहित्यकार हैं। उनके लेखन में गहराई, शोध और सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक मिलती है। उनकी पहली कृति “शिव तत्त्व” ने धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर उनकी गहरी पकड़ को सिद्ध किया था, वहीं “कायस्थ विरासत” उनके ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत करती है। उनकी रचनाएं केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहती हैं, बल्कि पाठकों को सोचने और अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

लोकार्पण समारोह में कई प्रतिष्ठित और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। महालेखाकार बिहार से सेवानिवृत्त शशि भूषण प्रसाद, ए.जी. कॉलोनी पटना की आशा अम्बष्टा, वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य सुरेन्द्र कुमार रंजन, पटना उच्च न्यायालय की प्रशाखा पदाधिकारी पूजा सबनम, कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के पंकज कुमार, बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के धर्मेश कुमार सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त अर्चना कुमारी, उमा शंकर प्रसाद वर्मा, स्मृति वर्मा, ऐलन इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर अमित सिन्हा, शालिनी सिन्हा, धीरज कुमार, प्रीति सिन्हा, पत्रकार आभा सिन्हा, सुरभि सिन्हा और अभियंता प्रशांत सिन्हा सहित अनेक समाजसेवी और बुद्धिजीवी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

यह पुस्तक न केवल कायस्थ समाज के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो भारतीय समाज की विविधता और उसकी ऐतिहासिक जड़ों को समझना चाहते हैं। आज के दौर में जब लोग अपनी परंपराओं और मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में “कायस्थ विरासत” जैसी कृतियां समाज को अपनी पहचान से जोड़ने का कार्य करती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अपनी विरासत को जानना और उसे संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल आत्मगौरव की भावना को जागृत करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शन का कार्य करता है।

“कायस्थ विरासत” का लोकार्पण एक साधारण आयोजन होते हुए भी अपने उद्देश्य और प्रभाव में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। यह कृति निश्चित रूप से साहित्य जगत में एक विशेष स्थान बनाएगी और कायस्थ समाज के साथ-साथ व्यापक पाठक वर्ग को भी नई दृष्टि प्रदान करेगी। जितेन्द्र कुमार सिन्हा की यह रचना उनके साहित्यिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो यह दर्शाती है कि जब लेखन में समर्पण, शोध और सामाजिक चेतना का समावेश होता है, तो वह केवल शब्दों का संग्रह नहीं रहता, बल्कि एक आंदोलन बन जाता है।
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