कृषि अनुसंधान परिसर, पटना के कार्यकारी निदेशक ने केंद्रीय कृषि मंत्री से की शिष्टाचार भेंट, संस्थान की गतिविधियों से कराया अवगत

कृषि अनुसंधान परिसर, पटना के कार्यकारी निदेशक ने केंद्रीय कृषि मंत्री से की शिष्टाचार भेंट, संस्थान की गतिविधियों से कराया अवगत

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष उपाध्याय और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास सरकार ने दिनांक 15 अप्रैल, 2026 को माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर दीघा क्षेत्र के माननीय विधायक डॉ. संजीव चौरसिया जी भी उपस्थित थे।
भेंट के दौरान कार्यकारी निदेशक ने मंत्री महोदय को संस्थान में चल रहे विभिन्न अनुसंधान एवं विकासात्मक कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने फसल अनुसंधान, भूमि एवं जल प्रबंधन, पशुधन एवं मत्स्य, बागवानी तथा कृषि प्रसार गतिविधियों के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे अभियानों पर प्रकाश डाला और कहा कि इस दिशा में संस्थान द्वारा रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम करने तथा हरी खाद एवं जैविक विकल्पों के उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु व्यापक जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
डॉ. उपाध्याय ने बताया कि संस्थान पूर्वी भारत के कृषि तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए जलवायु अनुकूल एवं संसाधन-संरक्षण आधारित तकनीकों के विकास और प्रसार पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके अंतर्गत किसानों के बीच आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखा जा सके। उन्होंने आगे कहा कि ढैंचा जैसी हरी खाद का फसलों में उपयोग करने को प्रोत्साहित कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा रही है। इससे मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा में वृद्धि होती है, साथ ही मिट्टी की संरचना एवं जल धारण क्षमता में भी सुधार होता है। इस प्रकार के प्रयास मृदा प्रदूषण को रोकने और मृदा स्वास्थ्य को दीर्घकाल तक स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
माननीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पूर्वी भारत की कृषि क्षमता को बढ़ाने में इस प्रकार के अनुसंधान एवं प्रसार कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने किसानों की आय वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत कृषि विकास के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों को सराहनीय बताया।

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