पारस हेल्थ पटना के डॉक्टरों ने आंध्र प्रदेश के मरीज को दिया नया जीवन
• स्ट्रोक के बाद 24 घंटे में हुई रिकवरी
पटना। चिकित्सा जगत में 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती समय) की अहमियत एक बार फिर साबित हुई। पटना के पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग ने आंध्र प्रदेश से आए एक 61 वर्षीय मरीज को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक के बाद सफलतापूर्वक ठीक कर एक मिसाल पेश की है। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और डिस्चार्ज के लिए तैयार है।
दरअसल, आंध्र प्रदेश निवासी 61 वर्षीय व्यक्ति पटना में एक आधिकारिक मीटिंग में शामिल होने आए थे। मीटिंग के दौरान अचानक उनके शरीर के दाहिने हिस्से (हाथ और पैर) ने काम करना बंद कर दिया और उनमें भारी कमजोरी महसूस होने लगी। मरीज को तुरंत पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें पारस एचएमआरआई रेफर कर दिया गया।
अस्पताल पहुँचते ही 'स्ट्रोक कोड' एक्टिवेट किया गया और *डॉ. चंदन किशोर* के नेतृत्व में इमरजेंसी टीम ने त्वरित कार्रवाई की। मरीज का तत्काल एमआरआई कराया गया, जिसमें दिमाग की नसों में खून का थक्का पाया गया।
न्यूरोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट *डॉ. हेमंत कुमार* और कंसल्टेंट *डॉ. कुमारी अर्चना* की देखरेख में मरीज का थ्रोम्बोलिसिस किया गया। डॉक्टर हेमंत ने बताया कि थ्रोम्बोलिसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दिमाग की नस में जमे खून के थक्के को दवा के जरिए घोला जाता है। इसके लिए लक्षण दिखने के शुरुआती 4.5 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। सौभाग्य से, मरीज घटना के एक घंटे के भीतर ही हमारे पास पहुँच गए थे।
इलाज के दौरान डॉक्टरों के सामने चुनौती यह थी कि थ्रोम्बोलिसिस में 6% मामलों में ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है। साथ ही, जांच में पता चला कि मरीज को शुगर और हाई बीपी की समस्या भी थी, जिसकी उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी। हालांकि, डॉक्टरों की सूझबूझ से इलाज पूरी तरह सफल रहा और 24 घंटे के भीतर मरीज के दाहिने हिस्से की ताकत वापस आ गई।
डॉक्टरों ने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में समय ही सबसे बड़ा इलाज है। यदि मरीज को सही समय पर अस्पताल लाया जाए, तो विकलांगता के खतरे को पूरी तरह टाला जा सकता है। वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर है और उनके सभी अंग सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
इस बारे में पारस एचएमआरआई के *जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार* ने कहा कि पारस हॉस्पिटल में स्ट्रोक मैनेजमेंट की एक समर्पित और अनुभवी टीम हमेशा तैनात रहती है। इस केस में मरीज का 'गोल्डन ऑवर' में अस्पताल पहुंचना सबसे निर्णायक साबित हुआ। हमारे डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई और अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाओं के कारण ही आज मरीज बिना किसी विकलांगता के पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। हम बिहार और आसपास के क्षेत्रों में विश्वस्तरीय आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
*पारस एचएमआरआई के बारे में*
पारस एचएमआरआई पटना ने 2013 में परिचालन शुरू किया। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है जिसके पास परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कैंसर उपचार केंद्र है। जून 2024 में एक्सेस किए गए एनएबीएच पोर्टल के अनुसार, पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना 2016 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला बिहार का पहला अस्पताल था। इस अस्पताल की बेड क्षमता 400 से ज्यादा की है, जिसमें 80 आईसीयू बेड शामिल हैं साथ ही 2 LINAC मशीन एंव PET-CT की सुविधा भी उपलब्ध है।
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