कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में “प्रयोगशाला कौशल एवं उद्यमिता पर व्यवहारिक प्रशिक्षण: वन हेल्थ दृष्टिकोण” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में “प्रयोगशाला कौशल एवं उद्यमिता पर व्यवहारिक प्रशिक्षण: वन हेल्थ दृष्टिकोण” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में “प्रयोगशाला कौशल एवं उद्यमिता पर व्यवहारिक प्रशिक्षण: वन हेल्थ दृष्टिकोण” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 11 मार्च 2026 को हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम “भैंस सुधार नेटवर्क परियोजना” तथा “संरक्षण कृषि पर कंसोर्टियम रिसर्च प्लेटफॉर्म” के “अनुसूचित जाति उपयोजना” के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में 14 छात्र भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. कमल शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में मृदा, पशु, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहरा ई से जुड़े हुए हैं, इसलिए ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को प्रयोगशाला सुरक्षा, आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, नमूना संग्रहण तथा विश्लेषण संबंधी व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है। इससे उनकी अनुसंधान क्षमता, वैज्ञानिक समझ तथा कृषि, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने की दक्षता का विकास होगा। 
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रयोगशाला सुरक्षा, रसायनों के सुरक्षित उपयोग, विभिन्न प्रयोगशाला उपकरणों के संचालन तथा माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित बुनियादी प्रयोगशाला तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी । साथ ही विभिन्न प्रयोगात्मक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों और प्रयोगशाला कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा।
आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को नमूना संग्रहण, प्रयोगशाला विश्लेषण, जैव-प्रौद्योगिकी तकनीकों, स्व-रोजगार आधारित उद्यमिता तथा ‘वन हेल्थ’ से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराते हुए कृषि, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनकी व्यावहारिक क्षमता एवं अनुसंधान कौशल का विकास करना है। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 मार्च 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

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