06 मार्च से 20 मार्च तक परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का आयोजन
जिलाधिकारी ने जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पटना समाहरणालय से ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, अधिकारियों को पखवाड़ा का सफलतापूर्वक आयोजन करने का दिया निदेश
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जनसंख्या नियंत्रण हमारे बेहतर विकास दर एवं मानव विकास सूचकांक के लिए आवश्यकः जिलाधिकारी
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स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन से संबंधित गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध; इच्छुक दम्पति इसका लाभ उठाएंः जिलाधिकारी
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प्रत्येक योग्य दम्पति तक पहुँच तथा जनसंख्या स्थिरीकरण के सपने को साकार करने का संकल्प लेने का जिलाधिकारी ने सभी स्टेकहोल्डर्स से किया आह्वान
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पटना, सोमवार, दिनांक 02.03.2026ः जिलाधिकारी, पटना डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने ‘‘परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा’’ (06 मार्च से 20 मार्च तक) के दौरान जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रति सघन जागरूकता उत्पन्न करने हेतु पटना समाहरणालय से ई-रिक्शा (सारथी रथों) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन, पटना; जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी, पटना; जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्वास्थ्य), पटना एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण हमारे बेहतर विकास दर एवं मानव विकास सूचकांक के लिए आवश्यक है। सभी स्टेकहोल्डर्स इसके प्रति सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहें तथा योजना के अनुसार पखवाड़ा का सफलतापूर्वक आयोजन करें। जिलाधिकारी ने कहा कि पूरे जिला में 48 रथ घूम-घूमकर लोगों को जनसंख्या नियंत्रण हेतु प्रेरित करेगा। ये सभी रथ आईसी (सूचना, शिक्षा एवं संचार) सामग्रियों से लैस है। हर एक ई-रिक्शा के साथ आशा फैसिलिटेटर को टैग किया गया है जिनके द्वारा आशा के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा तथा आम जन को सहायता प्रदान की जाएगी। इन रथों के माध्यम से परिवार नियोजन कार्यक्रम अन्तर्गत स्वास्थ्य संसाथानों में उपलब्ध निःशुल्क सेवाओं की जानकारी जन-जन तक पहुँचायी जाएगी तथा जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रति हरएक गाँव एवं शहर में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इस बारे में उन्होंने कुछ दिन पूर्व ही एक बैठक की थी तथा उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), जिला कार्यक्रम प्रबंधक (स्वास्थ्य), जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (जीविका); अस्पतालों के अधीक्षकों/उपाधीक्षकगण; सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों/स्वास्थ्य प्रबंधकों/सामुदायिक उत्प्रेरकों; परिवार कल्याण परामर्शी सहित सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को आपस में समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम को सफल बनाने का निदेश दिया था।
जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार के आदेश के आलोक में मिशन परिवार विकास अभियान का आयोजन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में दिनांक 23 फरवरी, 2026 से 20 मार्च, 2026 तक किया जा रहा है। इस दौरान दिनांक 23 फरवरी से 05 मार्च तक ‘‘दम्पति सम्पर्क सप्ताह’’ एवं दिनांक 06 मार्च, 2026 से 20 मार्च, 2026 तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” का आयोजन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निदेशित करते हुए कहा कि पखवाड़ा अन्तर्गत पूरे जिला में जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रति सघन जागरूकता अभियान चलाएँ, परिवार नियोजन कार्यक्रम अन्तर्गत उपलब्ध सेवाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाएँ तथा योग्य दंपतियों को इच्छित सेवा प्रदान करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि इन सभी कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य परिवार नियोजन के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाकर कुल प्रजनन दर (टीएफआर) को कम करना है। इसके लिए इस तरह का कार्यक्रम काफी महत्वपूर्ण एवं प्रभावकारी साबित होता है। उन्होंने अधिकारियों को पूरे जिला में सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) के विभिन्न माध्यमों यथा हैण्डबिल/पैम्फलेट, पोस्टर, बैनर, जागरूकता रथ, प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, पटना स्मार्ट सिटी के वीएमडी इत्यादि के द्वारा जनसंख्या नियंत्रण हेतु नियमित तौर पर जागरूकता अभियान चलाने का निदेश दिया। आशा फैसिलिटेटर, आँगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकाओं, जीविका दीदियों, विकास मित्रों, पंचायत कर्मियों इत्यादि के द्वारा जन-जन को जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रति उन्मुखीकरण करने का निदेश दिया गया ताकि समुदाय स्तर पर आम जन को उत्प्रेरित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के सफल आयोजन हेतु स्वास्थ्य के साथ-साथ त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं, आईसीडीएस, जीविका, कल्याण विभाग, सिविल सोसाईटी के बीच सार्थक समन्वय की आवश्यकता सुनिश्चित करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि माननीय सांसदों, विधायकों तथा नगर निकायों के प्रतिनिधियों से अनुरोध कर उनसे इस अभियान में मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त करें। जिलाधिकारी ने स्वयंसेवी संस्थानों के माध्यम से सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में विकास मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। माइक्रोप्लान के अनुसार प्रखण्ड स्तर पर सभी सम्बद्ध विभागों के पदाधिकारियों के बीच को-ओर्डिनेशन करें। लक्ष्य के अनुसार उपलब्धि प्राप्त करने के लिए तत्परता से कार्य करें। लोगों के बीच संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन करें। एएनएम को डेडिकेटेड काउंसेलिंग के लिए प्रतिनियुक्त करें। स्वास्थ्य संस्थानों तथा सार्वजनिक जगहों पर सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) सामग्रियों का प्रदर्शन करें। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य उप केन्द्रों तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वीएचएसएनडी कार्यक्रमों में सास-बहू-बेटी सम्मेलन को निदेशित करें। आवश्यकतानुसार तीन से पाँच पीएचसी को पुरूष बंध्याकरण सेवाओं के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट के साथ सम्बद्ध करें। पीएचसी स्तर तक स्वास्थ्य संस्थावार सूचीबद्ध (इम्पैनल्ड) सर्जन रखें।
जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के तहत प्रदत्त निःशुल्क सेवाएँ एवं लाभार्थियों तथा उत्प्रेरकों को प्रदान की जाने वाली राशि का भुगतान तत्परता से करें।
गौरतलब है कि परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के दौरान प्रति ब्लॉक 120 महिला बंध्याकरण तथा 10 पुरूष नसबंदी का लक्ष्य है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल तथा अनुमंडल अस्पताल द्वारा महिला बंध्याकरण का लक्ष्य 120 तथा पुरूष नसबंदी का लक्ष्य 40 है। इस प्रकार महिला बंध्याकरण का कुल लक्ष्य 2,880 तथा पुरूष नसबंदी का कुल लक्ष्य 270 है। इस तरह पखवाड़ा के दौरान जिले में बंध्याकरण तथा नसबंदी का कुल लक्ष्य 3,150 है। जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को लक्ष्य के अनुसार उपलब्धि सुनिश्चित करने का निदेश दिया। उन्होंने परिवार नियोजन के सभी उपायों यथा महिला बंध्याकरण, पुरूष नसबंदी, आई.यू.सी.डी.(कॉपर-टी), मिश्रित गर्भनिरोधक गोली (ओसीपी, माला-एन), गर्भनिरोधक सूई-एम.पी.ए.(अंतरा), सेन्टक्रोमेन (छाया) (साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली-डब्ल्यूसीपी), कंडोम (निरोध) तथा आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली (ईजी) की उपलब्धता स्वास्थ्य संस्थानों में सुनिश्चित करने का निदेश दिया।
जिलाधिकारी ने पखवाड़ा के दौरान परिवार नियोजन सेवाओं के तहत प्रदान की जाने वाली सेवा यथा कॉपर-टी, गर्भनिरोधक सूई (एमपीए), बंध्याकरण एवं नसबंदी की सेवा प्रदान करने पर विशेष रूप से ध्यान देने का निदेश दिया। जनसंख्या स्थिरीकरण की आवश्यकता, सही उम्र में शादी, पहले बच्चे में देरी, बच्चों के बीच सही अंतर तथा छोटा परिवार के लाभ के बारे में आमजन के मध्य चर्चा कर, माँ और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर करने तथा गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने हेतु परामर्श दिया जाए।
जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के दौरान माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के निदेश के अनुसार बंध्याकरण/नसबंदी से संबंधित गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराएँ। प्री-ऑपरेटिव (परामर्श, चिकित्सीय जाँच, पैथोलोजी जाँच इत्यादि) एवं पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के लिए मेडिकल टीम गठित करते हुए निःशुल्क सेवा सुनिश्चित करें। डेडिकेटेड टीम द्वारा ऑपरेशन के बाद की सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए। शिविरों में मूलभूत सुविधाएँ जैसे बेड, पेयजल इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित रहनी चाहिए। बंध्याकरण एवं नसबंदी कराए गए व्यक्तियों को उनके घर तक एम्बुलेंस से पहुँचाना सुनिश्चित करें। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में ‘‘अंतरा एवं छाया’’ सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। शहरी पीएचसी, अतिरिक्त पीएचसी एवं हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टर में आईयूसीडी सुविधाओं की उपलब्धता प्रशिक्षित सेवा प्रदाता द्वारा नियमानुसार सुनिश्चित करें। कंडोम बॉक्सेज के द्वारा कंडोम का वितरण सुनिश्चित कराएँ। सभी सम्बद्ध स्वास्थ्य संस्थानों में सेल्फ हेल्प किट उपलब्ध रहना चाहिए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निदेश दिया कि मिशन परिवार विकास अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नेहरू युवा केन्द्र, स्वयंसेवी सगंठनों, पल्स पोलियो, नियमित टीकाकरण तथा अन्य कार्यक्रमों के वोलन्टियर्स से समन्वय स्थापित करते हुए क्लायंट मोबिलाईजेशन किया जाए। बंध्याकरण/नसबंदी हेतु उत्प्रेरक राशि इन्हें भी देय है।
जिलाधिकारी ने कहा कि हम सभी प्रत्येक योग्य दम्पति तक पहुँचें तथा जनसंख्या स्थिरीकरण के सपने को साकार करने का संकल्प लें।
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