बिहार विद्यापीठ के स्थापना दिवस पर आपकी सरिता नाटक का मंचन, लाडली रॉय ने जीता दर्शकों का दिल।

बिहार विद्यापीठ के स्थापना दिवस पर आपकी सरिता नाटक का मंचन, लाडली रॉय ने जीता दर्शकों का दिल।

मंगलवार को पटना स्थित बिहार विद्यापीठ के प्रांगण में बिहार विद्यापीठ का स्थापना दिवस धूम धाम से मनाया गया।कार्यक्रम की शुरुआत फिल्म निर्देशक सह मुख्य अतिथि अरविंद रंजन दास,बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश (आई ए एस), बिहार विद्यापीठ के संयुक्त सचिव  अवधेश नारायण, डॉ राणा अवधेश, बिहार विद्यापीठ के वित्तमंत्री नीरज सिंहा, ए आई सी के डायरेक्टर प्रमोद कर्ण ,देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की डायरेक्टर मृदुला प्रकाश एवं देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की प्राचार्या पूनम वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर ए आई सी मीडिया टीम की, देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के छात्रों के द्वारा कई मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।इस अवसर पर पटना की चर्चित नाट्य संस्था अतुल्य आर्ट के द्वारा एकल नाट्य आपकी सरिता का भी मंचन किया गया।
 बिहार विद्यापीठ देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण नाटक में मुख्य भूमिका लाडली कुमारी ने निभाई और नाटक का निर्देशन भी लाडली कुमारी ने किया ,पार्श्व संगीत श्रीपर्णा तिवारी ने दिया नाटक के लेखक सतीश चित्रवंशी हैं | 
नाटक में लाडली कुमारी ने एक साथ कई भूमिकाएं निभाई। लाडली कुमारी के अभिनय ने दर्शक दीर्घा में बैठे दर्शकों का मन मोह लिया । इस नाटक के माध्यम से बच्चियों की शिक्षा और वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा की वजह से बच्चों में उत्पन्न हो रहे तनाव को रेखांकित करते हुए उन्हें कैसे तनाव मुक्त किया जा सकता है को समझाने का प्रयास किया गया है।
इस नाटक का कथानक यह है कि यह नाटक इंटर में पढ़ रहे लड़की सरिता की है जो इंजन में दो बार फेल हो जाती हैं लोगों के ताने सुनने के बाद और घर वालों के सहयोग ना करने पर वह तय करती है कि वह अपने आप को खत्म कर लेगी आत्महत्या कर लेगी लेकिन जब आत्महत्या करने जाती है तब वह सोचती है कि आत्महत्या करने से क्या लोग बदल जाएंगे क्या उसका रिजल्ट बदल जाएगा फिर वह तय करती है कि नहीं अब एक और बार फिर से पड़ेगी और पास होगा दिखाएगी वह हौसला तो करती है लेकिन उसके घर वाले उसे सपोर्ट नहीं करते हैं तब वह तय करती है कि वह अपने घर वालों का सपोर्ट नहीं लेगी और खुद से ही कुछ करेगी फिर वह किस स्कूल में जाती है और पढ़ाने के लिए लेकिन वहां उसे जॉब नहीं मिलती फिर वह कहीं और कोशिश करती है वहां उसे स्कूल में टीचर की जॉब मिल जाती है टीचर की जॉब करके उसे जो पहली सैलरी मिलती है उससे वह इंटर का प्राइवेट फॉर्म भर्ती है और एग्जाम की तैयारी में लग जाती है वह सुबह स्कूल में बच्चों को पढ़ाती शाम में मां को काम में मदद करती और फिर अपनी पढ़ाई रात में करती इन सब चक्कर में उसे उसकी तबीयत खराब हो जाती है तबियत खराब होने बावजूद भी वो परीक्षा देती इसकी उससे कीमत चुकानी पड़ती है बिना नियम के खाने पीने के वजह से उसे टाइफाइड हो जाता है यहां तक कि उसे हॉस्पिटल में एडमिट भी करना पड़ता है अंततः वो परीक्षा पूरी करती है और पास होकर दिखाती है उसके घर वाले भी उसके इस लगन और हौसले को मानते है और उसका नामांकन B. A में करवा देते है

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