बेगूसराय में आयोजित ‘वैज्ञानिक बत्तख पालन’ पर किसान–वैज्ञानिक संवाद

बेगूसराय में आयोजित ‘वैज्ञानिक बत्तख पालन’ पर किसान–वैज्ञानिक संवाद

बेगूसराय में गूंजा ‘वैज्ञानिक बत्तख पालन’ का मंत्र: किसान–वैज्ञानिक संवाद से आय वृद्धि की नई राह

आईसीएआर-आरसीईआर, पटना की पहल: वैज्ञानिक बत्तख पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा चौराही प्रखंड के एकम्बा गांव में ‘वैज्ञानिक बत्तख पालन’ विषय पर किसान–वैज्ञानिक संवाद सह जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन 26 फरवरी 2026 को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक बत्तख पालन को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम में एकम्बा गांव के 50 से ज्यादा प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और बत्तख पालन के प्रति अपनी जिज्ञासा प्रकट की। यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के नेतृत्व में किया गया।  उनके अनुसार बत्तख पालन न केवल किसानों के लिए सिर्फ आय का स्रोत नहीं है, बल्कि पोषण सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।  डॉ. उज्ज्वल कुमार (प्रमुख, सामाजिक आर्थिक एवं प्रसार) ने बिहार में वैज्ञानिक बत्तख पालन की व्यापक संभावनाओं तथा विपणन रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि विपणन की समस्या का समाधान कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने बत्तख पालन से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं आयोजन सचिव डॉ. रोहन कुमार रमण ने आधुनिक उत्पादन तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त करने के उपाय बताए।  वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती ने आर्द्रभूमि क्षेत्रों में बत्तख–मत्स्य समेकित कृषि मॉडल की उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि बत्तखों का अपशिष्ट तालाब की उर्वरता बढ़ाता है, जिससे मछली पालन की लागत घटती है और आय में वृद्धि होती है। केवीके बेगूसराय के पशु विशेषज्ञ डॉ. विपिन ने बत्तख पालन के लिए उपयुक्त शेड निर्माण एवं संतुलित आहार के महत्व पर प्रकाश डाला। संस्थान के वैज्ञानिकों ने एकम्बा क्षेत्र में बत्तख पालन की संभावनाओं को देखते हुए किसान सलाहकार श्री अनीश कुमार तथा प्रगतिशील किसान श्री आशीर्वाद कुमार के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया। समापन सत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस अवसर पर उपस्थित किसानों ने वैज्ञानिक पद्धति से बत्तख पालन प्रारंभ करने का संकल्प लिया। संस्थान ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयासों से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण को नई दिशा और गति मिलेगी।

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