धड़ल्ले से जारी कृषि भूमि अधिग्रहण से खाद्य सुरक्षा व पर्यावरण दोनों खतरे में*:- उमेश सिंह

धड़ल्ले से जारी कृषि भूमि अधिग्रहण से खाद्य सुरक्षा व पर्यावरण दोनों खतरे में*:- उमेश सिंह

*कृषि भूमि अधिग्रहण के कारण पटना जिला के नौबतपुर प्रखंड के अजवाँ बथानी के चर्रा मौजा का अस्तित्व संकट में*

*पटना* *04 फरवरी 2026*

      अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य सचिव उमेश सिंह के नेतृत्व में किसान महासभा के एक ऊंच स्तरीय जांच टीम आज पटना जिला के नौबतपुर प्रखंड के अजवाँ बथानी के चर्रा गांव में कृषि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों से मिला।
     किसानों ने जांच टीम को बताया कि उनके गांव में सालों फसल देने वाली 40एकड़ कृषि भूमि बिना किसी सूचना के गोरखा बटालियन के लिए अधिग्रहण की जा रही है । जिससे गांव का ही अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है क्योंकि इसके पूर्व पचास एकड़ से अधिक कृषि भूमि हाई पावर बिजली ट्रांमिशन ने बर्बाद कर दिया उसके बाद एक सौ एकड़ से अधिक कृषि भूमि बिहटा सरमेरा सिक्स लेन ने बर्बाद कर दिया है ।अब सिर्फ इस मौजा में यही लगभग 40 एकड़ कृषि भूमि जो गांव के पास बची है उसे भी अधिग्रहण कर लिया गया तो पूरी गांव भूमिहीन हो जाएगा । ऐसे भी अब तक उक्त अधिग्रहणों से इस गांव में दो चार कट्ठा से ले कर एक बिगहा से अधिक जमीन किसी के पास नहीं बची थी अब वह भी नहीं बचेगा। यहां तक कि प्रस्तावित दिल्ली हावड़ा बुलेट ट्रेन परियोजना के भी जद में यह गांव  पड़ रहा है मतलब गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। 
   इसलिए अब इस गांव के किसान अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जो भी करना पड़ेगा यहां तक कि जान भी देना परे दे कर गांव को बचाएंगे। इसके लिए किसान संघर्ष की रणनीति तैयार किए हैं जो जांच टीम के साथ किसानों ने साझा किया। इसके लिए न्यायालय से लेकर सड़क तक संघर्ष की योजना ली है और किसान संगठनों से भी मदद की अपील किया है।
    जांच टीम के नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य सचिव उमेश सिंह ने किसानों से वार्ता के अलावा अधिग्रण किए जाने वाली कृषि भूमि का भी मुआयना किया और पाया कि यदि यह अधिग्रहण हो गया तो सैंकड़ों वर्षों से बसा हुआ गांव एक दम से समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कृषि और किसान विरोधी केंद्र और राज्य सरकारों से अपील किया कि सरकारें किसानों को बर्बाद करने वाली नीतियों व कारगुज़ारियों से बाज आएं अन्यथा किसान जवाब देना जानते हैं। सरकारों को विकास के नाम पर कृषि भूमि ही क्यों चाहिए़ इसके लिए गैर कृषि भूमि का भी तो उपयोग किया जा सकता है। *असल मनसा इनका कृषि भूमि नष्ट करो ताकि कार्पोरेट को सस्ता श्रम मिल सके। इस षड़यंत्र के कारण न सिर्फ देश को खाद्यान्न संकट बल्कि पर्यावरण संकट का सामना करना पड़ेगा। और कार्पोरेट खाद्यान्न संकट से उत्पन्न भूख का सौदा करना चाहते हैं।*
   उन्होंने किसानों से अपील किया कि वे अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष को तेज करें ।अखिल भारतीय किसान महासभा और संयुक्त किसान मोर्चा न सिर्फ आपके संघर्ष के साथ रहेगा बल्कि आप के संघर्ष को ऊंचाई प्रदान करते हुए इसे पटना से लेकर दिल्ली तक लड़ेगा। 9 फरवरी 2026 को राज्य के सभी प्रखंड कार्यालयों पर और 23 फरवरी 2026 को बिहार विधानसभा के समक्ष पटना में अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा आहूत विरोध प्रदर्शनों में भाग लेकर अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए अपनी मांगों के बैनर के साथ भाग लेने के लिए किसानों से अपील किया।
      जांच टीम में किसान महासभा के राज्य पार्षद कॉमरेड मधेश्वर शर्मा,किसान महासभा पटना जिला के नेता अशोक कुमार एवं नौबतपुर भाकपा माले के सचिव श्रीकांत दास  शामिल थे ।
  जांच टीम से वार्ता करने वाले किसानों में प्रमुख संजीव कुमार,नीरज कुमार,ललन प्रसाद,भोला यादव,राम नसीब यादव,संजय यादव,राज कुमार,अर्जुन यादव,राकेश प्रसाद,पूजन यादव,अखिलेश कुमार,जय कुमार,महेंद्र यादव,फौजदारी यादव के साथ दर्जनों किसान मौजूद थे 

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