जीविका समूह केवल समूह नहीं, 11 लाख 'छोटी कंपनियां' हैं जो बिहार की तकदीर बदल रही हैं   :  जीवन कुमार

जीविका समूह केवल समूह नहीं, 11 लाख 'छोटी कंपनियां' हैं जो बिहार की तकदीर बदल रही हैं : जीवन कुमार

जितेन्द्र कुमार सिन्हा,पटना, 18 फरवरी ::

बिहार विधान परिषद (शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के सदस्य जीवन कुमार ने सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट और ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्तावों का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि 3,47,589 करोड़ रुपये का बजट बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा और विकासोन्मुखी बजट है।

उन्होंने विपक्ष को आईना दिखाया कि रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बने।
 उन्होंने कहा कि विपक्ष के साथी पूछते हैं कि रोजगार कहाँ है? उन्हें शायद दिखाई नहीं देता है। बिहार में चल रहे 11 लाख 45 हजार स्वयं सहायता समूह (SHG) को केवल समूह मानने की भूल नहीं करना चाहिए। यह 'छोटी-छोटी कंपनियाँ' (Micro Enterprises) हैं।

जीवन कुमार ने कहा कि इन समूहों ने 1 करोड़ 40 लाख परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी है और 31 लाख 71 हजार महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाया है। विपक्ष केवल सरकारी फाइलों में नौकरी ढूंढता रह गया है, जबकि एनडीए सरकार ने बिहार की महिलाओं को 'उद्यमी' और 'मालकिन' बना दिया है।

उन्होंने भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पंक्तियां "लीक छांड़ि तीनों चलें, शायर, शेर, सपूत" का जिक्र करते हुए पूर्व की सरकारों पर तीखा हमला बोला।

जीवन कुमार ने कहा कि 2005 से पहले की सरकारें 'कपूत' की तरह थीं जो पुरानी और गलत परंपराओं (जंगलराज) की लीक पर चल रही थीं। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए की सरकार 'सपूत' है, जो लकीर की फकीर नहीं है बल्कि विकास का नया रास्ता खुद बनाती है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कथन को दोहराते हुए कहा कि यह सरकार मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के बाद सबसे ज्यादा बजट (23,701 करोड़ रुपये) गाँवों के विकास के लिए दिया गया है। जबकि 2004-05 में जहाँ बजट का 14.5% ब्याज भरने में जाता था, अब कुशल प्रबंधन के कारण यह मात्र 7.3% रह गया है। जीविका दीदियाँ अब केवल अचार-पापड़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दीदी की रसोई, सोलर लैंप निर्माण और पुस्तकालय संचालन जैसे तकनीकी और सामाजिक कार्य कर रही हैं।

जीवन कुमार ने अंत में कहा कि यह बजट विकसित बिहार की नींव है और वे इसका पूर्ण समर्थन करते हैं।
               -----------

0 Response to "जीविका समूह केवल समूह नहीं, 11 लाख 'छोटी कंपनियां' हैं जो बिहार की तकदीर बदल रही हैं : जीवन कुमार"

एक टिप्पणी भेजें

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article