राज्य और समाज के लिए अभिशाप है बाल श्रम, इसके उन्मूलन को हों संकल्पित : सम्राट चौधरी

राज्य और समाज के लिए अभिशाप है बाल श्रम, इसके उन्मूलन को हों संकल्पित : सम्राट चौधरी

*बाल श्रम की रोकथाम, उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास को लेकर हुआ राज्य स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन* 

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, पटना द्वारा आज बाल श्रम की रोकथाम, उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास को लेकर एक महत्वपूर्ण एकदिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान, पटना में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बिहार सहित अन्य राज्यों में बाल श्रम के खिलाफ किए जा रहे वर्तमान प्रयासों की समीक्षा करना, चुनौतियों पर चर्चा करना और भविष्य की प्रभावी रणनीति तय करना रहा। कार्यक्रम में बिहार सरकार, अन्य राज्यों के श्रम विभाग, शिक्षा, पंचायती राज, समाज कल्याण विभाग, विधि विशेषज्ञों एवं गैर-सरकारी संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी उपस्थित रहे, जिनके कर-कमलों द्वारा बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, पटना की वर्ष 2026 की डायरी का विमोचन किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने बाल श्रम को राज्य और समाज के लिए गंभीर अभिशाप बताते हुए कहा कि आज भी यदि हजारों बच्चे श्रमिक के रूप में काम करने को मजबूर हैं, तो यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है। इसी उद्देश्य से बाल श्रम उन्मूलन से जुड़े आयोग का गठन किया गया है, ताकि श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के जीवन में खुशहाली लाई जा सके और उन्हें बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। उन्नति, ईमानदारी से आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का सबसे मजबूत रास्ता ज्ञान और शिक्षा है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में कई राज्यों के प्रतिनिधि और अनेक स्वयंसेवी संस्थाएँ (एनजीओ) शामिल हैं, जो अपने स्तर पर बाल श्रमिक बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाने का लगातार प्रयास कर रही हैं। उन्होंने सभी संस्थाओं और कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि आयोग अपना काम कर रहा है, लेकिन समाज के हर वर्ग का सहयोग जरूरी है, ताकि बिहार के गरीब बच्चों को श्रम से निकालकर स्कूल तक पहुँचाया जा सके। राष्ट्रीय बाल नीति का स्पष्ट संदेश है कि बाल श्रम का सबसे ज्यादा शिकार गरीब परिवारों के बच्चे होते हैं। उन्हें यह पता ही नहीं होता कि उनकी प्रतिभा उन्हें कितनी ऊँचाई तक ले जा सकती है। ऐसे बच्चों को जागरूक करना और शिक्षा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं। आज लगभग हर पंचायत में हाई स्कूल उपलब्ध हैं।  इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़ता। जहाँ डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहाँ नए कॉलेज खोलने की योजना पर काम हो रहा है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार ने तेजी से प्रगति की है। अब सभी अनुमंडलों में आईटीआई, महिलाओं के लिए अलग आईटीआई, नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज मौजूद हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि अब जरूरत है व्यापक जागरूकता अभियान की। कानून साफ है कि बच्चों से श्रम नहीं कराया जाना चाहिए। बच्चों की पहचान पहले एक छात्र के रूप में होनी चाहिए, न कि एक मजदूर के रूप में। सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, एनजीओ और समाज के लोगों से अपील की गई कि वे मिलकर यह संकल्प लें कि आने वाले वर्षों में बिहार का कोई भी बच्चा बाल श्रमिक न बने और हर बच्चे को शिक्षा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य मिले।

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, पटना के अध्यक्ष श्री अशोक कुमार बादल ने बाल श्रम को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि जब तक हर बच्चा स्कूल नहीं जाएगा, खेलेगा नहीं और अपने सपने पूरे नहीं करेगा, तब तक विकसित भारत और उन्नत बिहार की कल्पना अधूरी रहेगी। इसी उद्देश्य से आयोग जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक कार्यबल गठित कर बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान, विमुक्ति, पुनर्वास और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। साथ ही, जन-जागरूकता की कमी को दूर करने के लिए नुक्कड़ नाटक, मीडिया, सोशल मीडिया और कार्यशालाओं के माध्यम से व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि बाल श्रम उन्मूलन को जनआंदोलन बनाएं और मिलकर बिहार को वास्तविक अर्थों में बाल श्रम मुक्त राज्य बनाएं।

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, पटना के उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि आज भी 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध होने के बावजूद गरीबी और अशिक्षा के कारण यह समस्या बनी हुई है, जिसे समाप्त करने के लिए आयोग बाल श्रम मुक्त बिहार के संकल्प के साथ सक्रिय अभियान चला रहा है। धावा दलों, छापेमारी, विमुक्ति, पुनर्वास, शिक्षा और परिवारों को सहायता देकर बच्चों को दोबारा श्रम में लौटने से रोका जा रहा है, वहीं जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर गठित कार्यबल सामुदायिक स्तर पर इसकी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ प्रयासों को नई दिशा देती हैं और सभी से अपील की कि मिलकर यह संकल्प लें कि कोई भी बच्चा मजदूर नहीं बनेगा और हर बच्चा स्कूल जाएगा, ताकि बिहार सच अर्थों में बाल श्रम मुक्त राज्य बन सके।

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार के सचिव श्री दीपक आनन्द ने बताया कि बाल श्रम उन्मूलन के क्षेत्र में बिहार में बीते वर्षों में बाल श्रमिकों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है—वर्ष 2024–25 में 1213 बच्चों की विमुक्ति के मुकाबले 2025–26 में अब तक यह संख्या 581 रही है—जो जागरूकता अभियानों और सरकारी प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। इसके बावजूद लक्ष्य शून्य बाल श्रम का है, जिसके लिए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग और बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग मिलकर रेस्क्यू, पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ने और परिवारों को सहायता देने जैसे कदम लगातार उठा रहे हैं। ऐसी कार्यशालाएँ अनुभव साझा करने, कमियों की पहचान करने और भविष्य की प्रभावी रणनीति तय करने का सशक्त मंच हैं, जिनसे यह अभियान और मजबूत होगा।     

इससे पूर्व कार्यशाला का शुभारंभ विभिन्न राज्यों द्वारा बाल श्रम की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों को साझा करने के साथ हुआ। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार के संयुक्त श्रमायुक्त श्री विजय कुमार की अध्यक्षता में ओडिशा, असम और महाराष्ट्र के श्रमायुक्त एवं उनके प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों के अनुभव और सफल मॉडलों की जानकारी दी। पहले सत्र में बाल श्रम रोकथाम के वर्तमान प्रयास, प्रमुख चुनौतियाँ एवं भविष्य की रणनीति पर गहन विमर्श किया गया। इस दौरान पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर किए जा रहे प्रयासों, शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल ड्रॉपआउट और बाल श्रम के बीच संबंध तथा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा अपनाए जा रहे उभरते रोकथाम मॉडल प्रस्तुत किए गए। वहीं, सेवानिवृत्त प्रो. हेलन सेकर (वी. वी. गिरी राष्ट्रीय श्रमिक अनुसंधान संस्थान) ने बाल श्रम उन्मूलन में विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर व्याख्यान दिया।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में बाल श्रमिकों के पुनर्वास और विभागीय समन्वय पर विशेष चर्चा की गई, जिसकी अध्यक्षता चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना के कुलसचिव प्रो. डॉ. एस. पी. सिंह ने की। इस सत्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा विमुक्त बाल श्रमिकों के पुनर्वास, गृह विभाग द्वारा बाल श्रम उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयास तथा नागरिक समाज संगठनों के सफल उदाहरणों को साझा किया गया। साथ ही, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. सुगंधा सिन्हा ने बच्चों से संबंधित विधिक प्रावधानों एवं केंद्र व बिहार सरकार की पुनर्वास योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला के तीसरे सत्र की अध्यक्षता उप श्रमायुक्त (मुख्यालय) श्री राजेश कुमार ने की, जिसमें बाल श्रम पर आधारित स्किट नाटक, विमुक्त किशोरों की प्रेरक सफलता की कहानियाँ, प्रशस्ति पत्र एवं किट वितरण किया गया। इसके अलावा SAP 2025 में समन्वय मॉडल, बाल श्रम से विमुक्त बच्चों के अंतर्राज्य स्थानांतरण में विभिन्न विभागों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला के समापन सत्र में श्रमायुक्त श्री राजेश भारती ने कार्यशाला के निष्कर्ष प्रस्तुत किए, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, पटना की श्रम अधीक्षक (बाल श्रम) श्रीमती स्नेहा सृजन द्वारा किया गया।

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