तेलहाड़ा महोत्सव 2026 में “साकार कलाकृति” के कलाकारों का रहा जलवा

तेलहाड़ा महोत्सव 2026 में “साकार कलाकृति” के कलाकारों का रहा जलवा

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 13 जनवरी, 2026 ::

नालंदा जिला के हिलसा अनुमंडल अंतर्गत तेलहाड़ा में तीन वर्षों के अंतराल के बाद “तेलहाड़ा महोत्सव 2026” का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक उत्सव का शुभारंभ नालंदा के सांसद, स्थानीय विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मंच से जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, पूरा परिसर लोक-संस्कृति, संगीत और उल्लास से भर उठा। ग्रामीण अंचल में आयोजित इस महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बिहार की लोक-परंपराएं आज भी जीवंत हैं और जनमानस में गहराई से रची-बसी हैं।

पटना की प्रसिद्ध संस्था “साकार कलाकृति” के कलाकारों ने अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राधा सिन्हा, प्राची कुमारी, रश्मि कुमारी, तनु कुमारी, संजना कुमारी, निशा कुमारी, मानसी कुमारी, विवेक कुमार और अजित कुमार की टीम ने पारंपरिक विवाह नृत्य, झिझिया नृत्य, छठ पर्व नृत्य तथा “बिहार गौरव” गीत पर मनोहारी प्रस्तुति दी। इन नृत्यों में बिहार की लोक-संस्कृति, आस्था और सामाजिक जीवन की झलक साफ दिखाई दी। हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज से पूरा पंडाल गूंज उठा।

गायन कार्यक्रम में गायक लालकेश्वर उर्फ शिवम् ने अपनी सुरीली आवाज में “मुझे दिल की बीमारी है…” और “तुम माने या न माने दिलदारा…” जैसे गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं गायक एवं अभिनेता मुन्ना पंडित उर्फ देवराज मुन्ना ने “मैं निकला गड्डी लेके…” गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। संगीत के साथ पूरा माहौल उत्सवमय बन गया और लोग अपने स्थानों पर थिरकते नजर आए।

कार्यक्रम में मैजिशियन कलाकार नाल गुड्डू, पैड ब्रजेश और ऑर्गन पर दीपक ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का दिल जीत लिया। अतिथि दीर्घा में सुप्रसिद्ध समाजसेवी एवं आर्यभट्ट चेतना मंच के संस्थापक सुनील कुमार गावस्कर की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

साकार कलाकृति पटना संस्था के सचिव सवीर उर्फ रोज ने जिला प्रशासन नालंदा, अनुमंडल प्रशासन हिलसा, सभी समाजसेवियों और दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का कार्य करते हैं।

तेलहाड़ा महोत्सव 2026 न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि इसने बिहार की लोक-संस्कृति, कला और परंपरा को नई ऊर्जा दी। यह महोत्सव लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में उत्सव की तरह जीवित रहेगा।
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