माननीय कृषि मंत्री ने किया सोनपुर मेला में कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन फसल अवशेषों को खेतों मे न जलाने की अपील की :- राम कृपाल यादव

माननीय कृषि मंत्री ने किया सोनपुर मेला में कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन फसल अवशेषों को खेतों मे न जलाने की अपील की :- राम कृपाल यादव

माननीय मंत्री, कृषि विभाग, बिहार श्री राम कृपाल यादव द्वारा आज विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में अध्यक्ष, राज्य किसान आयोग श्री रूप नारायण मेहता प्रधान सचिव, कृषि श्री पंकज कुमार, विशेष सचिव श्री वीरेन्द्र प्रसाद यादव, प्रबंध निदेशक, बी०आर०बी०एन० डॉ० स्पर्श गुप्ता, कृषि निदेशक श्री नितिन कुमार सिंह, निदेशक उद्यान श्री अभिषेक कुमार सहित सारण क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के पदाधिकारीगण एवं किसानगण उपस्थित थे।

माननीय मंत्री ने अपने उ‌द्घाटन भाषण में कहा कि हरिहर क्षेत्र के इस पावन धरती पर विश्व प्रसिद्ध मेला में कृषि प्रदर्शनी का शुभारम्भ करते हुए मुझे हर्ष एवं गर्व महसूस हो रहा है। सोनपुर वह पावन धरती है. जहाँ पौराणिक काल में कभी गज एवं ग्राह की लड़ाई हुई थी। गज अपने को असुरक्षित महसूस कर भगवान से मदद की गुहार लगाया था एवं भगवान असहाय गज की पुकार सुन स्वयं प्रकट होकर ग्राह से गज की रक्षा की थी। यहाँ बाबा हरिहरनाथ जी का भव्य पौराणिक मंदिर भी है। प्राचीन हरिहरनाथ मंदिर हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जहाँ वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा से एक महीने तक के लिए विश्व प्रसिद्ध मेला का आयोजन किया जाता रहा है। आज भारत में जहाँ लोक संस्कृति दिनों-दिन विलोपित होती जा रही है. वहीं सोनपुर का यह मेला अपनी पौराणिक धरोहर को जीवंत बनाये रखा है। आज भी सोनपुर मेला पशु मेला के रूप में विश्व प्रसिद्ध है।

बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ लगभग 76 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है। राज्य की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 21 प्रतिशत है। यहाँ के 90 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं, जिनकी आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाना राज्य के आर्थिक विकास की कुंजी है। माननीय प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य है कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बने, और यह तभी संभव है जब बिहार तेज गति से प्रगति करे। बिहार का समग्र विकास ही राष्ट्र के समृद्ध भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।

उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रकृति ने बिहार को उपजाऊ मिट्टी और प्रचुर जल संसाधनों का वरदान दिया है। साथ ही, यहाँ कृषि जलवायु की विशाल विविधता है, जो बागबानी तथा औषधीय पौधों सहित बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के फसलों की खेती को संभव बनाती है। बिहार गंगा की तराई में बसा है। यहाँ भूगर्भीय जल काफी मात्रा में है। सब्जियों की पैदावार में हम सबसे आगे हैं। शहद, मशरुम, मखाना, लीची पैदा करने में भी हम सबसे आगे हैं। अन्नास, आम, केला, अमरूद, गन्ना, जूट आदि पैदा करने में भी हम बहुत आगे हैं। हमने इन कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार एवं प्रसंस्करण की सुविधा राज्य के अन्दर उपलब्ध कराने हेतु विशेष रुप से पहल की है। राज्य के कुछ जिलों में धान की कटनी के समय एक विकट समस्या विकराल रूप ले रहा है। धान के पुआल को खेत में जलाने की समस्या लगातार बढ़ रहा है। पुआल के जलाने से एक तरफ वातावरण प्रदूषित हो रहा है, तो दूसरी तरफ मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। यह चिन्ता की बात है।

माननीय मंत्री ने कहा कि रबी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए रबी अभियान चलाया जा रहा है। इसकी सफलता के लिए जरूरी है कि किसानों को समय पर बीज मिले और जो बीज दिया जा रहा है, वह उच्च गुणवत्ता की है। यह दोनों ही दायित्व कृषि विभाग के पदाधिकारियों की है।

उन्होंने कहा कि किसानों से ऑनलाइन आवेदन लेना तथा आवेदन को स्वीकृत करना एवं किसानों के घर तक बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करना, प्रत्येक कृषि पदाधिकारी का महती दायित्व है। यह भी ध्यान रखा जाये कि छोटे तथा सीमान्त किसान तक योजना का लाभ पहुँचे। किसानों को खाद सही समय पर मिले तथा उचित मूल्य पर मिले यह शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जायेगा। राज्य में खाद की आपूर्ति से लेकर डीलर के 
दुकान में उर्वरक की उपलब्धता के प्रत्येक बिन्दु पर नियमित समीक्षा किया जा रहा है। सीमावर्ती जिला में उर्वरक के परिचालन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। राज्य स्तर से पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर सीमावर्ती जिलों में उर्वरक परिचालन का निरीक्षण किया जाये।

यह विशेष ध्यान रखा जाये कि अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ सीमान्त किसानों तक पहुँचे। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा कि योजना का लाभ सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित रह जाये। विभागीय योजनाओं का लाभ बड़े किसानों के साथ-साथ छोटे एवं सीमान्त किसानों को भी अधिक से अधिक मिले। इस वर्ष कृषि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत 75 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है। सभी जिलों में यांत्रिकरण मेला का भी आयोजन किया जा रहा है। अन्य विकल्पों के साथ भी किसान मेला में कृषि यंत्र क्रय करने का विकल्प किसानों को दिया जा रहा है। साथ ही, किसानों को मेला में कृषि यंत्र से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

कार्यक्रम के दौरान बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति (BAIPP) योजनान्तर्गत मेसर्स औरो सुन्दरम फूड्स एंड फीड्स प्रा० लि०, अररिया के सफल कृषि-उद्योग संचालन उपरान्त अंतिम किस्त के रूप में मो० 37,50,000.00 (सैंतीस लाख पचास हजार) रूपये एवं मेसर्स श्री श्याम फूड्स, गोरौल, वैशाली को प्रथम किस्त के रूप में मो० 26,40,000.00 (छब्बीस लाख चालीस हजार) रूपये का चेक वितरण किया गया। इसके साथ ही महिला किसानों के बीच बीज का वितरण भी किया गया।
उन्होंने कहा कि कृषि यांत्रिकरण योजना में "पहले आओ, पहले पाओ प्रणाली की त्रुटियों को दूर करने के लिए इस योजना में लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है। बिहार के किसान खुशहाल हों, किसानों की आमदनी बढ़े, ग्रामीण युवाओं में कृषि के प्रति आकर्षण हो, कृषि सम्मान का पेशा बने, इसके लिए पूरा कृषि परिवार एक साथ काम करेगा। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र मेला के इस प्रांगण में कृषि विभाग द्वारा लगाये गये प्रदर्शनी तथा स्टॉल से जुड़े सभी कर्मियों, पदाधिकारियों तथा इस कार्यक्रम में भाग ले रहे सभी किसान भाईयों एवं बहनों को धन्यवाद देता हूँ।

अंत में माननीय मंत्री ने विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र गेला के इस प्रांगण में कृषि विभाग द्वारा लगाये गये प्रदर्शनी तथा स्टॉल से जुड़े सभी कर्मियों, पदाधिकारियों तथा इस कार्यक्रम में भाग ले रहे सभी किसान भाईयों एवं बहनों को धन्यवाद दिया।

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