विश्व खाद्य दिवस 2026*(आज करें नवाचार, कल करें पोषण)डॉ0 आशुतोष उपाध्यायप्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभागभारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना- 800014

विश्व खाद्य दिवस 2026*(आज करें नवाचार, कल करें पोषण)डॉ0 आशुतोष उपाध्यायप्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभागभारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना- 800014

1. मुख्य विषय — आह्वान
कुहासा भुखमरी का इस धरा पर, छा नहीं सकता। 
हो दौर कैसा भी वो मानव को, तड़पा नहीं सकता।
"आज का नवाचार" यदि, संकल्प बन जाए हमारा। 
"कल का पोषण" सुनिश्चित, संकट आ नहीं सकता।
2. लघु एवं सीमांत उत्पादक (कृषक, मछुआरे, पशुपालक) — रीढ़
परंपरा की धरोहर में, हमें नया विज्ञान संजोना है। 
धरा के विधाताओं को, पानी बिना न अब रोना है।
लघु उत्पादक ही सृजक हैं, धरा की प्राण-वायु के। 
जब इन्हें संबल मिले, विश्व का कल्याण होना है।



3. अकादमी और विश्वविद्यालय — वैचारिक सेतु
सिर्फ ग्रंथों में सिमटे शोध का, कभी गौरव नहीं होता। 
संकट में जो न काम आये, वैज्ञानिक वैभव नहीं होता।
अकादमी जब दे समाधान, जोड़कर माटी को मेधा से। 
फिर इस लोक में भुखमरी का, कभी तांडव नहीं होता।
4. शोधकर्ता और वैज्ञानिक — समाधान
चुनौती मौसमों की हो यहाँ, या फसलों की बीमारी हो।
पर वैज्ञानिकों की नवीन खोज, हर संकट पर भारी हो।
'वन हेल्थ' के दर्शन से मिलता है, हर जीव को जीवन। 
उन्हीं के दम पे अब सबके, पोषण की भव्य तैयारी हो।
5. नागरिक समाज संगठन — समता
सरकारों और जनता के बीच, जो न्याय के स्वर हैं। 
अँधेरे हाशिए पर, जो निखरते उजालों के समंदर हैं।
नागरिक समाज ही, नारी व युवाओं को देता शक्ति। 
तो वो बदलाव लाते हैं, जो इस मूल तंत्र के अंदर हैं।
6. राज्य एवं केंद्र सरकार — नेतृत्व
नीतियों में जब 'अन्न के अधिकार' की, हुंकार होती है। 
तभी तो भुखमरी के इस तंत्र पर, सीधी कटार होती है।
सुरक्षा चक्र सामाजिक, सुदृढ़ और पूरी तरह पारदर्शी हो। 
सरकारों के इसी नेतृत्व से, मिली खुशी अपार होती है।
7. निजी क्षेत्र और कॉर्पोरेट — मूल्य
मुनाफे की तराजू से परे भी, एक दुनिया है यहाँ पर।  
इंसानियत व सतत विकास की, बुनियाद है जहां पर।
निजी क्षेत्र जो तकनीक व पोषण में, निवेश करता है। 
उसी के हाथों नए युग की, सुनहरी बागडोर है यहाँ पर।

8. रिटेल, कोल्ड चेन और बाजार — संरक्षण
खेत से थाली तलक, हर एक दाना कीमती ठहरा। 
अब रसोई से दुकानों तक, लगा तकनीक का पहरा।
जो रोक सके बर्बादी को, हमारा वही सच्चा हितैषी। 
उसी से दूर हो पायेगा, व्यवस्था का ज़ख्म गहरा।
9. आम जनता और उपभोक्ता — कर्तव्य
हमारी थाली का हर अंश, एक संकल्प बन जाये। 
बर्बादी को तज दें हम, कि हर मन तृप्त हो पाये।
स्वदेशी और मौसमी अन्न को, जो देता सम्मान। 
वही तो इस देश की माटी का, सच्चा कर्ज चुकाये।
10. वैश्विक एकजुटता — उपसंहार
अकेली कोई भी सत्ता, यह विपदा टाल नहीं सकती। 
सुलगती भूख को, सीमा की रेखा पाल नहीं सकती।
वैश्विक एकजुटता ही, समस्या का हल खोज पायेगी। 
वरना कोई ताकत इस संकट से, निकाल नहीं सकती।
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