लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम से सम्बंधित मामलों की सुनवाई में त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन पर जोर
पटना, 29 अगस्त।
प्रमंडलीय आयुक्त श्री राजेश कुमार ने लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्रथम अपीलीय प्राधिकार के रूप में पटना प्रमंडल के विभिन्न जिलों से संबंधित 25 लोक शिकायत मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उन्होंने अधिकांश मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन किया, जबकि शेष मामलों में संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक जाँच कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्पष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
प्रमंडलीय आयुक्त ने रोहतास, भोजपुर, नालंदा, बक्सर एवं पटना जिले से संबंधित विभिन्न मामलों की सुनवाई की
भोजपुर जिले की निशू कुमारी ने शिकायत की कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से संबंधित आवश्यक दस्तावेज EPF कार्यालय, पटना को उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण उन्हें कंपोजिट क्लेम की राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, भोजपुर को निर्देश दिया कि सभी आवश्यक कागजात विशेष दूत के माध्यम से EPF कार्यालय, पटना भेजना सुनिश्चित करें तथा मामले का समाधान कराते हुए नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित कराएं।
रोहतास जिले के अम्बिका प्रसाद चंद्रवंशी ने शिकायत की कि सार्वजनिक सरकारी चापाकल को हटाकर उस स्थान पर सड़क का निर्माण कर दिया गया है। इस पर प्रमंडलीय आयुक्त ने कार्यपालक अभियंता, PHED को निर्देश दिया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए उचित एवं सुविधाजनक स्थान पर नया चापाकल लगवाना सुनिश्चित करें।
नालंदा जिले की सिम्पी कुमारी ने स्वयं सहायता भत्ता नहीं मिलने की शिकायत की। मामले की सुनवाई के दौरान प्रमंडलीय आयुक्त ने DRCC के संबंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया कि राज्य स्तर से राशि प्राप्त होते ही नियमानुसार उन्हें स्वयं सहायता भत्ता की राशि उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
नालंदा जिले के राजकुमार पासवान ने जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा मकान किराया भत्ता की राशि के भुगतान में अनियमितता किये जाने की शिकायत की। प्रमंडलीय आयुक्त ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को मामले की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन की एक प्रति शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही मामले की आगे सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित करने का निर्देश दिया गया।
बक्सर जिले के विशाल कुमार सिंह ने ब्रह्मपुर प्रखंड के बगेन पैक्स में वित्तीय वर्ष 2025-26 में धान अधिप्राप्ति में अनियमितता किए जाने की शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने संयुक्त निबंधक, सहकारिता विभाग को मामले की समीक्षा कर अपना मंतव्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर को मामले में दोषी पाए जाने वाले जिम्मेवार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा अगली सुनवाई में स्वयं आयुक्त कार्यालय, पटना में उपस्थित रहने को कहा।
बक्सर के मनोज कुमार राय द्वारा सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि का भुगतान नहीं किए जाने संबंधी शिकायत की सुनवाई करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, बक्सर को निर्देश दिया कि 15 दिनों के अंदर नियमानुसार सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि का भुगतान सुनिश्चित करें।
बक्सर के शारदेनंदु कुमार राय की रैयती भूमि की फर्जी जमाबंदी किए जाने एवं उसे रद्द कराने से संबंधित शिकायत पर प्रमंडलीय आयुक्त ने अपर समाहर्ता, बक्सर को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई के लिए सप्ताह में तीन दिन निर्धारित करते हुए एक माह के अंदर सुनवाई पूरी करें तथा मामले का नियमानुसार निष्पादन सुनिश्चित करें।
शारदेनदु कुमार राय की ही एक अन्य शिकायत में आरोप था कि उनकी जमीन से जुड़े मामले की जाँच पुलिस उपाधीक्षक स्तर से सही ढंग से नहीं की जा रही है। इस पर प्रमंडलीय आयुक्त ने बक्सर के IAS प्रोबेशनर को मामले की जाँच कर स्पष्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
जयप्रकाश चौधरी ने शिकायत की कि उनकी स्कूटी का पटना में विभिन्न स्थानों पर चालान जनरेट किया गया है, जबकि उनकी स्कूटी कभी पटना गई ही नहीं। सुनवाई के दौरान यातायात पुलिस के संबंधित पदाधिकारी ने बताया कि चालान को निरस्त कराने के लिए राज्य परिवहन आयुक्त को पत्र भेजा गया है।प्रमंडलीय आयुक्त ने इस मामले की गंभीरता पूर्वक जाँच कर उचित आवश्यक कार्रवाई ससमय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रमंडलीय आयुक्त श्री राजेश कुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम का उद्देश्य आम नागरिकों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरल, प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने पटना प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आम जन की समस्याओं एवं लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों का पूरी संवेदनशीलता, गंभीरता एवं गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करें।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिकायतों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए तथा जाँच की आवश्यकता वाले मामलों में तथ्यपरक एवं स्पष्ट प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिकायतकर्ताओं को बार-बार कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े और उन्हें उनकी समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान मिल सके।
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