पटना समाहरणालय में रेरा से संबंधित बैठक का आयोजन
रेरा के प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण; सभी स्टेकहोल्डर्स इसका अक्षरशः अनुपालन करेंः जिलाधिकारी
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अधिकारियों को नियमित तौर पर उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन कर उपभोक्ताओं को जागरूक करने का जिलाधिकारी ने दिया निदेश
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पटना, शुक्रवार, दिनांक 12.06.2026ः समाहर्त्ता-सह-जिला पदाधिकारी, पटना डॉ. त्यागराजन एस.एम. की अध्यक्षता में आज पटना समाहरणालय में रेरा; जिला प्रशासन, पटना एवं नगर निकायों के अधिकारियों की समन्वय बैठक हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के विनियमन एवं प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी स्टेकहोल्डर्स यथा रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय बिल्डर्स, डेवलपर्स एवं प्रोमोटर्स; नगर निकायों के अधिकारी, राजस्व से संबंधित पदाधिकारी तथा आमजन इसका अक्षरशः अनुपालन करें। उन्होंने कहा कि सरकार के विशेष, लोकप्रिय एवं जनोपयोगी प्रयासों से पटना का वृहत स्तर पर विकास हो रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए रेरा के नियमों के बारे में जन-जन को जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण हो। जिलाधिकारी ने कहा कि रेरा वैधानिक रूप से फ्लैट एवं प्लॉट क्रेताओं को परियोजना में विलंब, संरचनात्मक त्रुटि आदि से संरक्षण प्रदान करता है। साथ ही यह रियल एस्टेट के क्षेत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं वित्तीय अनुशासन भी सुनिश्चित करता है। अतः सभी संबंधित पदाधिकारी इसके प्रति सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहें तथा इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध विधि-सम्मत सख्त कार्रवाई करंे।
रेरा, बिहार के अनुरोध पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस बैठक में जिला पदाधिकारी ने जिले के क्षेत्रीय पदाधिकरियों को निदेश दिया कि वे भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा), बिहार द्वारा रेरा अधिनियम का उलंघन करने वाले बिल्डरों के विरुद्ध चलाये जा रहे विशेष अभियान में सक्रिय सहयोग दें ताकि ऐसे लोगों पर त्वरित कार्रवाई द्वारा घर एवं प्लॉट खरीददारों के हितों की रक्षा की जा सके।
रेरा अधिनियमों की बारीकियों को समझाते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जमीन/राजस्व संबंधी मामले काफी संवेदनशील होते है तथा अल्प त्रुटि होने पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव कई दशक तक रहता है। इसे रोकने की आवश्यकता है। सभी स्टेकहोल्डर्स को इसके लिए सजग एवं तत्पर रहना पड़ेगा। *जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी अपार्टमेंट जो बिक्री के लिए बनाई जा रही हो और जिसमें फ्लैट की संख्या 8 से अधिक हो या कुल भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक हो तो उसका रेरा निबंधन आवश्यक है। उसी प्रकार से अगर जमीन की प्लॉटिंग कर बेची जा रही हो और ऐसे प्रोजेक्ट की भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से अधिक है तो उसका भी रेरा निबंधन आवश्यक* है। जिलाधिकारी ने कहा कि गैर-निबंधित प्रोजेक्ट में प्लॉट खरीदने से क्रेता का पैसा फंस सकता है। ऐसे प्लॉट्स के निबंधन एवं दाखिल-खारिज पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके जनता दरबार में इस प्रकार के अनेक मामले आते हैं जिसमें क्रेताओं के साथ ट्रिक एवं फ्रॉड की गई रहती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर वे अनुमंडल पदाधिकारियों एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों तथा अन्य वरीय पदाधिकारियों को जाँच कर त्वरित कार्रवाई करने का निदेश देते है ताकि लोगों की समस्या का निदान हो। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसी स्थिति को रोकने के लिए यह आवश्यक है कि क्रेता प्लॉट-फ्लैट खरीदने से पहले प्रोजेक्ट की रेरा निबंधन संख्या एवं रेरा के अन्य प्रावधानों के अनुपालन की स्थिति बुद्धिमत्तापूर्वक जाँच लें। उन्होंने प्लॉटेड प्रोजेक्ट की जमीन बिक्री करने वालों का रेरा निबंधन भी अनिवार्य रूप से देखने को कहा ताकि प्लॉट खरीदने वालों का पैसा न फंसे। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे बिक्रेता जिन्होंने बिक्री किये जाने वाले प्लॉटेड प्रोजेक्ट का रेरा निबंधन नहीं कराया है वे अधिनियम के अंतर्गत दंड के भागी हो सकते है तथा पकड़े जाने पर उन्हें आम जनता से धोखाधड़ी करने के आरोप में जुर्माना भरने के साथ-साथ जेल भी जाना पड़ सकता है।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिलान्तर्गत विभिन्न प्रक्षेत्रों यथा दानापुर-शिवाला-कन्हौली रोड, मीठापुर एलिवेटेड बाईपास से पुनपुन वाया सम्पतचक तथा एम्स से नौबतपुर तक के प्रक्षेत्रों का रेरा एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा सैटलाईट चित्र आधारित जाँच (इमेजरी बेस्ड इन्सपेक्शन) अभियान के तहत संयुक्त निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने संयुक्त जाँच दल को परियोजनाओं का निरीक्षण प्रतिवेदन ससमय समर्पित करने का निदेश दिया। उन्होेंने कहा कि निरीक्षण में पाए गए तथ्यों के आधार पर विधिवत कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के बीच संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित कर फ्लैट-प्लॉट क्रेताओं सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को जागरूक करने का निदेश दिया। साथ ही उन्होंने पदाधिकारियों को अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित कर रेरा अधिनियमों का प्रभावकारी एवं सकारात्मक क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निदेश दिया। जिलाधिकारी द्वारा आम जनता से भी रेरा द्वारा निर्गत मार्ग-दर्शिका एवं प्रावधानों पर विशेष ध्यान देने एवं अनुपालन करने का आह्वान किया गया।
इस बैठक में रेरा जाँच आयुक्त श्री संजय कुमार सिंह, सचिव श्री अनिमेष पाण्डेय, पटना के नगर आयुक्त श्री यशपाल मीणा सहित रेरा बिहार के अधिकारी एवं पटना में पदस्थापित क्षेत्रीय पदाधिकरियों ने हिस्सा लिया।
पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए रेरा जांच आयुक्त श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि *रेरा अधिनियम के प्रावधानों को अक्षरशः लागू करने में जिला एवं म्युनिसिपल प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है एवं उनके सक्रिय सहयोग के बिना यह संभव नहीं* है।
यहाँ यह बता देना आवश्यक है कि रेरा, बिहार के विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिनियम का उलंघन करने वाले बिल्डरों की पहचान एवं सुसंगत कानूनी कार्रवाई है ताकि आम लोग ऐसे बिल्डरों के झांसे में आकर अपने मेहनत की कमाई को गलत जगह निवेश न कर बैठें। इस अभियान को सॅटॅलाइट चित्र आधिरित जांच (Imagery Based Inspection/IBI) का नाम दिया गया है। इसमें सॅटॅलाइट चित्रों में माध्यम से वैसे प्रोजेक्ट्स की पहचान की जाती है जो रेरा अधिनियम का उलंघन कर बनाए जा रहे प्रतीत होते हैं। तत्पश्चात सम्बंधित जिले के प्रशासन के सहयोग से रेरा एवं जिले के क्षेत्रीय पदाधिकरियों द्वारा स्थल जांच की जाती हैं एवं जरूरी सूचना संग्रहीत की जाती है ताकि कानून का उलंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
रेरा बिहार ने अपने IBI अभियान के तहत सारण, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा एवं मुजफ्फरपुर में ऐसी कार्रवाई की है। जहाँ सारण में 18 बिल्डरों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गयी है, वहीँ भागलपुर एवं पूर्णिया में यह संख्या क्रमशः 9 एवं 5 है। दरभंगा में ऐसे 19 मामले पाए गए हैं एवं मुजफ्फरपुर में 11 बिल्डरों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गयी है। सॅटॅलाइट चित्र के माध्यम से पटना में अबतक ऐसे 29 बिल्डरों की पहचान की गयी है एवं शुक्रवार को पटना समाहरणालय में आयोजित बैठक के पश्चात रेरा बिहार एवं पटना जिला प्रशासन के संयुक्त दलों द्वारा स्थक निरिक्षण का कार्य शुरू किया गया ताकि जरूरी सूचनाएं एकत्रित करने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सके।
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