देश की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण को ख़तरे में डालने वाली सरकारों की नीतियों का पर्दाफाश करो और संघर्ष को तेज करो! का आह्वाहन उमेश सिंह
*भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता को किसानों के लिए गुलामी का दस्तावेज बताते हुए इसे अविलंब रद्द करना होगा! अन्यथा मोदी सरकार को किसान उखाड़ फेंकेंगे* *अरुण सिंह*
*पटना 23 फरवरी 2026*
आज अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में राज्य भर से हजारों किसान गर्दनिबाग स्थित गेट पब्लिक लाइब्रेरी के गेट पर जमा हुए जहां से एक विशाल जुलूस के रूप में *"किसानों को गुलाम बनाने के दस्तावेज भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करो के साथ 15 सूत्री अन्य मांगों पर बिहार विधानसभा के समक्ष विरोध मार्च* आयोजित किया।
विरोध मार्च गर्दनीबाग धरना स्थल गेट पर पहुंचा जहां गेट बंद कर मजिस्ट्रेट ने विरोध मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया।
तदोपरांत वहां विरोध मार्च सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य सचिव उमेश सिंह ने किया और संचालन राज्य सह सचिव अभिषेक कुमार ने किया।
सभा की अध्यक्षता करते हुए उमेश सिंह ने कहा कि आज सरकारें लगातार देश की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण को ख़तरे में डालने वाली नीतियां ले रही हैं।हमें इसे पर्दाफाश करते हुए पुरजोर विरोध करना होगा और संघर्ष को तेज करना होगा।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण सिंह(विधायक) ने कहा कि भारत लगातार अमेरिका के सामने नतमस्तक होते हुए देश की संप्रभुता को ही अमेरिका के पास गिरवी रख दिया है। जिसे आप भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता जो किसानों के लिए गुलामी का दस्तावेज है के रूप में देख सकते हैं। देश का किसान इसे कत्तई स्वीकार नहीं करेंगे।हमने तीन काले कृषि कानूनों को अपने संघर्ष के बल पर मोदी सरकार को पीछे धकेला है।इसमें भी हम मोदी सरकार को किसानों को गुलाम बनाने नहीं देंगे।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कॉमरेड शिवसागर शर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों की सरकारें किसानों,मजदूरों व गरीबों के हितों के पक्ष में बने अब तक के सभी कानूनों को कॉर्पोरेट के पक्ष में लगातार बदलने यहां तक कि खत्म कर देने की कोशिश कर रही है। पहले काले कृषि कानूनों के जरिय कृषि व कृषि उत्पाद को लूट लेने की कोशिश की गई।मजदूरों के पक्ष में 38 कानूनों को समेट कर चार श्रम संहिता के जरिय मजदूरों को कॉर्पोरेट गुलाम बना देने की कोशिश और अब वी बी ग्राम जी के जरिय मनरेगा को खत्म कर दिया गया है ।चोर दरवाजे से पुनः काले कृषि कानूनों को कृषि विपणन पर नए राष्ट्रीय प्रस्ताव के जरिय लागू करने की कोशिश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब तक खेत खेती किसानों के पास है और जंगल आदिवासियों के संरक्षण में है तब तक ही देश खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण सुरक्षा है । सरकारों की नीतियों ने इसे संकट में डाल दिया है । हमे इन सरकारों के खिलाफ मुक्कमल संघर्ष छेड़ना होगा।
मांगों में प्रमुखता से सिंचाई का प्रश्न था जिसमें इंद्रपुरी जलाशय का निर्माण,नहरों का आधुनिकरण,नलकूपों को चालू करने ,उतर कोयल नहर को पूरा करने की मांग वक्ताओं ने उठाया।
,भौतिक सत्यापन के जरिय किसानों को खेती का कागजात और गरीबों को वास की जमीन का कागज मुहैया कराने,एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि मंडियों को चालू करने की मांग,किसानों को मुफ्त बिजली,स्मार्ट मीटर की वापसी,बिजली का निजीकरण पर रोक, कृषि भूमि अधिग्रहण पर रोक और 2013 के कानून का अक्षरशः पालन करने की मांग, प्रस्तावित विद्युत विधेयक 2025, प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 की वापसी,मनरेगा की पुनर्बहाली,गन्ना किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपया देय,किसानों को 60 वर्ष के बाद दस हजार मासिक पेंशन आदि से जुड़े मांग पर जो मुख्यमंत्री बिहार को संबोधित था सरकारी प्रतिनिधि को सौंपा गया ।
कार्यक्रम को वरिष्ठ नेता के डी यादव,शैलेन्द्र कुमार,अनिल कुमार,विनोद कुशवाहा, जयनाथ यादव, मंगल यादव,रणधीर कुमार,महावीर पोद्दार,बालेश्वर यादव, रणवीर कुशवाहा , रामाधार सिंह और पूर्व विधायक कॉम रामबली सिंह यादव ने भी संबोधित किया।
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